ज्ञानपुर। सरकारी धन में घपलेबाजी करने के आरोपों में घिरे जिले के 32 ग्राम प्रधानों पर प्रशासनिक शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जिलाधिकारी विशाख जी ने इन ग्राम प्रधानों के खिलाफ 31 जनवरी तक जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही इन प्रधानों को बचाने की मंशा से अभिलेख उपलब्ध न कराने पर आठ ग्राम पंचायत अधिकारियों का वेतन रोक दिया है।
गावों के विकास के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार से 14वें वित्त समेत अन्य मदों से मिले धन में ग्राम प्रधानों से लेकर अधिकारियों तक ने खूब बंदरबांट की है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में सेमरा, मरसड़ा, सायर, कनकपुर, जमुनीपुर अठगवां, भमौरा, डीघ, मल्लूपुर समेत 32 गांवों में शौचालय ओर प्रधानमंत्री आवास निर्माण, मनरेगा के कार्य व वृक्षारोपण में व्यापक पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ था। मरसड़ा, डीघ समेत 15 गावों में प्रारंभिक जांच में दो से 15 लाख रुपये तक की घपलेबाजी उजागर हुई थी। जांच शुरू हुई तो मामले को दबाने के लिए ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत अधिकारियों और जांच अधिकारियों ने जुगलबंदी कर ली। इसका परिणाम यह हुआ कि जांच आगे बढ़ ही नहीं पाई।
गुरुवार की रात कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी ने समीक्षा बैठक की तो यह मामला सामने आया। इस पर उन्होंने जांच अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और एक दिसंबर 2017 से पहले की सभी मामलों की जांचें 31 जनवरी तक पूरी कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। साथ चेतावनी दी कि इसमें लापरवाही बरतने वालों का वेतन रोका जाएगा। वहीं, जांच अधिकारियों ने बताया कि कई ग्राम पंचायत अधिकारी अभिलेख नहीं दे रहे हैं। इस पर डीएम ने भमौरा, भटेवरा, भिदिउरा, भगवास, उमरिया समेत आठ गांवों के ग्राम पंचायत अधिकारियों का वेतन रोक दिया। वहीं, जांच में उदासीनता बरतने वाले जिला उद्यान अधिकारी और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को हटा दिया गया। बैठक में एडीएम रामसिंह वर्मा, एसडीएम आशीष कुमार, एएसडीएम अमृता सिंह और डीडीओ जयकेश त्रिपाठी आदि मौजूद थे।