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घर मसान परिजन जनु भूता...

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वाराणसी। महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के सामने गंगा पार डोमरी में सोमवार को जुटे हजारों भक्तों को संत मोरारी बापू ने मानस मसान की महत्ता बताते हुए संगीतमय रामकथा सुनाई। बापू ने ‘घर मसान परिजन जनु भूता, सुत हित मीत मनहुं जमदूता’, इस चौपाई के माध्यम से मानस मसान की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि जिस समय अयोध्या के राजा दशरथ की मृत्यु हो गई, उस समय माता कौशल्या के लिए घर मसान के समान हो गया था। उनके प्रिय पुत्र राम और लक्ष्मण वन के लिए निकल गए थे। छोटे पुत्र भरत और शत्रुघ्न अपने ननिहाल में थे।
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बापू ने कहा कि रामकथा भगवान राम की तरह कोमल है और कराल भी है। रामचरित मानस का आदि दैविक रूप सुहाना है। हर कामना सिद्ध हो जाए या कामना निकल जाए, यही मानस मसान है। मानस में कई तरह के मसान हैं। दशरथ का मसान सरयू का तीर, बालि का मसान रणासन में, जटायू का मसान राम के समीप और शबरी का मसान अग्नि में है।
नौ दिवसीय रामकथा के चौथे दिन बापू ने कहा कि धर्म, अर्थ और काम में पुरुष आगे होता है। मोक्ष के समय महिला आगे होती है। जिन घरों में इनका असंतुलन होता है, वहां स्थिति दयनीय हो जाती है। परम तत्व ही एक ऐसी जगह है, जिसके साथ हम जो चाहें नाता जोड़ सकते हैं। बापू ने कहा कि तुलसी को गाओगे तो भक्ति बढे़गी और भागवत प्रेम बढे़गा। उन्होंने कहा कि ईश्वर के साथ किसी ना किसी रूप में संबंध जोड़ दो। जिसके कोई संतान नहीं है, वह अपने इष्ट या बाल गोपाल से संबंध जोडे़। यह जुड़ाव ही प्रभु के प्रति प्रेम और भक्ति है।
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कभी-कभी हम अच्छे लोगों की संगत में होते है लेकिन उनकी अच्छाई का लाभ नहीं ले पाते। इसलिए शास्त्रों का अध्ययन करना चाहिए। शास्त्र स्वयं उदार बनकर हमें मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने शिव और शक्ति की भी व्याख्या की। कहा कि इन दोनों की पहचान गुरु तत्व के माध्यम से ही हो सकती है, क्योंकि महादेव का चरित समुद्र है, उसे वेद भी पार नहीं कर सकते है। इस मौके पर काशीराज परिवार के कुंवर अनंत नारायण सिंह, आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, प्रकाश पुरोहित, रवींद्र जोशी, रूपेश व्यास, विकास पुरोहित, मंत्रराज पालीवाल और सतुआ बाबा संतोषदास ने व्यासपीठ पर पुष्पांजलि अर्पित की।
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