वाराणसी। भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित एआरटीओ आरएस यादव ने जिला जेल की चहारदीवारी के भीतर भी खुद के लिए मनमाफिक व्यवस्था बना ली है। भ्रष्टाचार से कमाए गए रुपयों की बदौलत आरएस यादव और उसके दो करीबी बगैर किसी बीमारी और लिखा-पढ़ी के जेल के अस्पताल के बेड मुलायम गद्दे पर पंखे और कूलर के सामने आराम फरमाते हैं। यही नहीं, आरएस के पीने के लिए जेल के बाहर से 40 रुपये लीटर वाला स्पेशल मिनरल वाटर, तीन बार नाश्ता और दो बार का भोजन आता है। जेल सूत्रों के अनुसार इसके एवज में आरएस यादव को रोजाना लगभग आठ हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
जिला जेल में जब आरएस यादव को निरुद्ध किया गया तो शुरुआती दौर में कारागार प्रशासन ने खासी सख्ती बरती थी। इसके चलते आरएस यादव काफी दिन तक परेशान रहा। मगर, फिर उसके लोगों ने आरएस यादव के पुराने परिचित परिवहन माफियाओं से संपर्क किया। पूर्वांचल के परिवहन माफियाओं के कई गुर्गे जिला जेल में निरुद्ध हैं। उन्हीं गुर्गों ने जेल में आरएस यादव के लिए माहौल तैयार किया और फिर रुपये की हनक की बदौलत धीरे-धीरे उसे मनमाफिक सुविधाएं मिलने लगीं।
जेल सूत्रों के अनुसार आरएस यादव दिन भर जेल के अस्पताल की बैरक में पड़ा रहता है और उसके दोनों करीबी भी साथ होते हैं। हालांकि तीनों को कोई बीमारी नहीं है। सीधे-सादे बंदी आरएस यादव का हाथ-पैर दबाते हैं। उससे मिलने भी रोजाना उसके परिवार के लोग और करीबी आते रहते हैं लेकिन लिखा-पढ़ी में सभी किसी अन्य बंदी से मुलाकात करना बताते हैं। इस तरह से जिला जेल में निरुद्ध होकर भी आरएस यादव पूरी तरह मनचाहे घरेलू माहौल में मौज के साथ रह रहा है। इस संबंध में जिला जेल के वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. बीडी पांडेय का कहना है कि आरएस यादव एक सामान्य बंदी की भांति बैरक नंबर 11 में निरुद्ध है। आरएस यादव को कभी जेल अस्पताल में नहीं रखा गया। उसे किसी भी प्रकार की विशेष सुविधा दिए जाने जैसी बात पूरी तरह निराधार है।