बाबा महाश्मशान नाथ का शिवलिंग मलबे के बीच दबा, रेत और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के बीच शव लेकर पहुंचने में दिक्कत,
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। गंगा के जलस्तर में कमी आने के बाद घाटों की तस्वीर बदल गई है। पानी पीछे हटने से कई स्थानों पर कीचड़ के साथ ऊबड़-खाबड़ मलबे का अंबार लगा है। इसका असर मणिकर्णिका घाट पर होने वाले अंतिम संस्कार पर भी पड़ रहा है। परेशानियों के बीच प्रतिदिन करीब 100 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। रेत और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के बीच शव लेकर पहुंचने में दिक्कत हो रही है। मलबे के कारण मणिकर्णिका घाट स्थित बाबा महाश्मशान नाथ शिवलिंग भी मलबे के बीच दबा है।
गंगा का जलस्तर शनिवार को 63.14 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार पानी लगातार घट रहा है। मौजूद समय में जहां पहले तक गंगा का पानी था, वहीं रेत और गाद जमा होने से रास्ते असमतल हो गए हैं। कई घाटों पर सफाई हो रही है, वहीं कई पर मलबा वैसे ही पड़ा है। सबसे ज्यादा परेशानी मणिकर्णिका घाट पर शवदाह करने वालों को हो रही है। मणिकर्णिका घाट पर बाढ़ के बाद रोजाना 70 से 80 शव ही जलाए जा रहे थे। पानी कम होने के बाद करीब 100 शव जलाए जा रहे हैं। इन शवों को को लेकर आ रहे लोगों को मलबे और कीचड़ के बीच से होते हुए शवदाह स्थल तक पहुंचना पड़ रहा है। मलबा इतना अधिक है अभी बाबा महाश्मशान नाथ का शिवलिंग मलबे के बीच दबा है। मंदिर के बाहर तक मलबा है। हालांकि, इन परेशानियों को देखते हुए नगर निगम के कर्मचारी घाटों की सफाई में जुटे हुए हैं। नगर निगम कर्मचारियों ने बताया कि अगले 7 दिनों में घाट पूरी तरह साफ हों जाएंगे।