एसपी ने बताया कि विवेचना के दौरान ठगों का एक नेटवर्क सामने आया। जिसमें पता चला कि वह भोले-भाले लोगों को लोन एवं सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर कागजात लेते और ठगी करते।
मुखबिर की सूचना पर आरोपी अंशुल मिश्रा निवासी कांवल, मोहम्मद शोएव निवासी यादवपुर महासी सबलापुर बहराइच और कपिल रावत निवासी धरमंगत खेड़ा थाना मोहनलालगंज लखनऊ को गोपीगंज ओवरब्रिज के पूर्वी छोर के पिलर नंबर 52 के सामने बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया। एसपी ने बताया कि आरोपियों के पास से मिली मोबाइल से 200 से अधिक बैंक खातों का डिटेल मिला। उन्होंने बताया कि गैंग के वांछितों की तलाश की जा रही है।
इस तरीके से करते थे ठगी
एसपी अभिनव त्यागी ने बताया कि आरोपी लोन दिलाने के नाम पर उनका खाता खुलवाकर सिम निकालकर उससे बैंक का पूरा डिटेल पासबुक, एटीएम व खाते से रजिस्टर्ड सिम कार्ड लेकर राजस्थान, दिल्ली, झारखंड, लखनऊ और अन्य शहरों में कोरियर के माध्यम से तथा खुद जाकर पूरा डिटेल अपने साथियों को पहुंचाते है। साथियों से ये लोग ह्वाट्सएप्प, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के माध्यम से जुड़े रहते।
अवैध धन को मोहनलालगंज के पेट्रोल पंप पर लगाते थे ठिकाने
पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि लोन का प्रलोभन देकर लोगों को चूना लगाते। खाता खुलने के बाद उन खातों के एटीएम कार्ड, पासबुक और बैंक से लिंक मोबाइल नंबर अपने कब्जे में ले लेते। उसके बाद देश के किसी भी कोने से साइबर ठगी करते। पूछताछ में यह भी सनसनीखेज खुलासा हुआ कि अवैध रूप से अर्जित धन को ठिकाने लगाने के लिए ये लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित 'शशि फिलिंग स्टेशन' पेट्रोल पंप का इस्तेमाल करते थे।
इस गिरोह का सदस्य कपिल रावत उसी पेट्रोल पंप पर काम करता था। जहां वे ठगी के पैसों को एटीएम से निकालने के बजाए पंप की स्वाइप मशीन के जरिए फर्जी ट्रांजेक्शन कर कैश में बदल लेते थे। आरोपियों ने स्वीकार किया कि पिछले एक साल के भीतर उन्होंने पेट्रोल पंप और एटीएम के माध्यम से लगभग 10 लाख रुपये की निकासी कर आपस में बांट लिए हैं।