प्रश्न: दिल्ली में कोरोना पॉजिटिव होने का औसत हर तीन में से एक तक पहुंच चुका है। अगर इसे एक आंकड़े की तौर पर देखें तो हर तीन प्रवासी श्रमिक में से एक कोरोना पॉजिटिव हो सकता है। उत्तर प्रदेश पर पहले ही कोरोना का भारी दबाव है? आप इस स्थिति से कैसे निबटेंगे?
कोरोना का यह फेज जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उसने हम सबके लिए चुनौती खड़ी कर दी है। हम इस स्थिति से निपटने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। राजधानी लखनऊ के केजीएमसी अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए 6000 बेड आरक्षित कर दिए गये हैं। बलरामपुर के 213 बेड के अस्पताल में 700 बेड बना दिए गये हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश के हर जिले में अस्पतालों को ज्यादा संख्या के साथ तैयार कर दिया गया है। हर जिले के नोडल अधिकारी इस स्थिति पर लगातार निगरानी कर रहे हैं। जैसी भी आवश्यकता होगी, हम और अधिक बेड्स उपलब्ध कराएंगे।
प्रश्न:- पूरे देश में मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। उत्तर प्रदेश में भी ऑक्सीजन की समस्या है। आप इस स्थिति में क्या कर रहे हैं?
ऑक्सीजन की कमी एक बड़ी समस्या बनकर उभर रही थी। हमने DRDO से मिलकर ऑक्सीजन तैयार करने वाले प्लांट्स लगाने शुरू कर दिए हैं। लखनऊ के एक प्लांट से ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू भी हो गया है और अन्य से भी जल्दी ही ऑक्सीजन का पर्याप्त उत्पादन होगा और ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
प्रश्न: हाईकोर्ट ने कहा कि कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश के पांच बड़े जिलों में तत्काल लॉकडाउन लगाना चाहिए। आप इससे सहमत क्यों नहीं हैं?
हमारी न्यायपालिका का पूरा सम्मान है। सुप्रीम कोर्ट में जो भी होगा, सरकार उसके अनुसार आगे चलेगी। लेकिन हम यही कहना चाहते हैं कि हमारे लिए ‘जीवन और आजीविका’ दोनों ही महत्वपूर्ण है और हमें दोनों को बचाना है। हम ब्लैंकेट बैन लगाने की बजाय सख्त नियम लगाकर, नागरिकों से उनका पालन सुनिश्चित कराकर कोरोना को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। हम कोई ऐसी स्थिति नहीं पैदा होने देना चाहते जहां किसी व्यक्ति की रोजी-रोटी छीन जाए क्योंकि यह बहुत बड़ी तकलीफ होती है और हम किसी भी कीमत पर नहीं चाहते कि किसी का रोजगार ख़त्म हो। सरकार कोरोना को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
प्रश्न: ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर प्रमुख दवाओं की कालाबाजारी हो रही है। रेमडेसिविर का एक इंजेक्शन जो 1000-4000 रूपये के बीच बिकता है, शिकायत है कि गाजियाबाद में इसे कालाबाजारी कर 50,000 रुपये तक में खरीदा-बेचा जा रहा है। आप इस स्थिति से कैसे निबट रहे हैं?
किसी भी चीज की कालाबाजारी करने पर अपराधियों पर एनएसए लगाकर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा आपदा प्रबंधन कानून के तहत भी अपराधियों को दबोचने की कोशिश की जा रही है। ड्रग कंट्रोलर के माध्यम से दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। सरकार नोडल अधिकारियों-मंत्रियों को 24 घंटे तैनात रखकर लोगों की सेवा कर रही है। हमें उम्मीद है कि हम इस समस्या से जल्द ही उबर सकेंगे।