इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण को लेकर पैदा हुई विस्फोटक स्थिति के लिए प्रदेश सरकार पर तीखी टिप्पणी की है। साथ ही जिस तरीके से पंचायत चुनाव कराए जा रहे हैं, उसे लेकर भी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को कोरोना की दूसरी लहर के परिणाम का अंदाजा था इसके बावजूद कोई योजना नहीं बनाई गई। कोर्ट ने कहा कि जिस तरीके से पंचायत चुनाव कराए जा रहे हैं और अध्यापकों व सरकारी कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए मजबूर किया जा रहा है। लोक स्वास्थ्य की अनदेखी कर पुलिस को पोलिंग बूथ पर भेज दिया गया, हम इससे नाखुश हैं।
कोरोना संक्रमण की स्थिति की मॉनिटरिंग कर रही न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने कहा कि चुनाव कराने वाले अधिकारियों को भी पता है कि लोगों को एक दूसरे से दूर रखने का कोई तरीका नहीं है। चुनाव के फोटोग्राफ देखने से स्पष्ट है कि कहीं भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया गया। कई चुनाव रैलियों में लोगों ने मास्क भी नहीं पहने। ऐसे आयोजकों के खिलाफ महामारी अधिनियम में कार्रवाई की जाए और इस अदालत को इससे अवगत कराया जाए।