फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ट्रेन डकैती: यूपी पुलिस ने डकैतों को भागने दिया!

Thu, 03 Apr 2014 12:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश के भरथना में हुआ संगम एक्सप्रेस डकैती कांड पुलिस के सारे बंदोबस्त की पोल खोलती है। डकैतों द्वारा 50 मिनट तक वारदात, उसके बाद आराम से भाग निकलना और खेतों में जाकर लूट के माल का बंटवारा करना थाना और जिला पुलिस की निष्क्रियता की कहानी बताता है। इस कांड के बाद सिस्टम में कई स्तर पर नाकामियां सामने आईं।
विज्ञापन


हाईटेक दौर में जब इस तरह की वारदातें पूरी तरह से खत्म हो जानी चाहिए, ऐसे दौर में वारदातों का बढ़ना पुलिस की ट्रेनिंग, उनकी मनोदशा, काम करने के अंदाज पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पूरे कांड में जिला पुलिस के अलावा सबसे अधिक निष्क्रियता भरथना थाने की सामने आई।

भरथना थाने से महज डेढ़ किमी दूर 50 मिनट तक ट्रेन खड़ी कर डकैती पड़ती रही, गोलियां चलती रहीं, चीख पुकार मचती रही, लेकिन पुलिस को भनक तक नहीं लगी।

डेढ़ किलोमीटर जाने में पुलिस को लगा इतना समय!

यहां तक की ट्रेन के एक यात्री द्वारा पुलिस कंट्रोल रूम को किया गया फोन भी नहीं उठा। हद तो ये हुई कि वारदात शुरू होने के करीब 25 मिनट बाद ही भरथना थाना पुलिस को सूचना मिल गई थी। फिर भी फोर्स को डेढ़ किलोमीटर दूर घटनास्थल में पहुंचने में 20 मिनट से अधिक का समय लग गया। फोर्स जब मौके पर पहुंचा तो डकैत भाग चुके थे।

माना कि डकैत पुलिस फोर्स के आने से 10 मिनट पहले भाग निकले, तो सवाल ये है कि आखिर 10 मिनट या फिर 20 मिनट बाद भी यदि फोर्स पहुंचा तो इतने समय में (10 या 20 मिनट) में कोई कितनी दूर भाग सकता है। वो भी जब वारदात के बाद डकैतों ने खेत में लूट के सामान का बंटवारा किया हो।

भागने का समय और दूरी का अंदाजा लगाकर आसपास के गांव समेत क्षेत्र की व्यापक घेराबंदी क्यों नहीं की गई। भरथना पुलिस के पास इस बात का जवाब नहीं है। कुल मिलाकर भरथना पुलिस ने इस तरह की निष्क्रियता दिखाई कि डकैतों को भागने का पूरा मौका मिल सके।

इस तरह फैली सूचनाएं

संगम एक्सप्रेस को सोमवार रात 12:38 बजे लुटेरों ने सीपुरा गांव के पास रोका। ट्रेन रोकते ही बदमाशों ने लूटपाट और फायरिंग की। ट्रेन के ड्राइवर श्याम सुंदर व सहायक चालक हेमंत कुमार व ट्रेन के गार्ड ने पांच मिनट में टुंडला स्थित कंट्रोल रूम को डकैती की सूचना दे दी।

वहीं करीब 12:50 बजे यात्रियों ने भी पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देने की बात कही। भरथना थाना पुलिस को भी सूचना दी गई। टुंडला कंट्रोल रूम से इटावा आरपीएफ के पास 12:50 बजे लूटपाट और ट्रेन खड़ी होने की सूचना आई।

इसके बाद इटावा स्टेशन मास्टर की ओर से रात 1:05 बजे जीआरपी थाना को मेमो भेजा गया। यानी वारदात खत्म होने से 20 से 30 मिनट पहले ही इटावा में सभी को अलर्ट कर दिया गया था।

ये क्यों नहीं हुआ

-वारदात खत्म होने से काफी पहले पुलिस और जीआरपी को सूचना मिल चुकी थी। पुलिस के आलाधिकारियों ने तत्काल रणनीति बनाकर मौके पर भारी पुलिस और पीएसी बल क्यों नहीं भेजा। जबकि चुनाव को देखते हुए पुलिस पीएसी को सक्रिय किया जा चुका है।

-डकैतों की धरपकड़ के लिए आसपास के रास्तों की घेराबंदी नहीं की गई। जिले की सीमाएं भी सील नहीं कराई गईं।

-पूरी आशंका थी कि डकैतों ने आसपास के गांवों में शरण ली, पीएसी लगाकर गांवों में तत्काल ही सर्च आपरेशन क्यों नहीं चलाया गया। यदि एसएसपी ऐसा करते तो क्या कोई उन्हें मना करता।

-वारदात के बाद डकैतों के भागने का समय जितना बीतता गया, उसी हिसाब से पुलिस ने तलाश के लिए चेकिंग का दायरा क्यों नहीं बढ़ाया।

-भरथना थाने का पुलिस फोर्स डेढ़ किमी की दूरी 20 मिनट में क्यों नहीं तय कर पाया, पैदल भी आते तो 10 मिनट में पहुंच जाते।

एस्कार्ट के चारों सिपाही सस्पेंड

संगम एक्सप्रेस में वारदात के समय डकैतों का मुकाबला करने के बजाय टॉयलेट में दुबककर जान बचाने वाले जीआरपी कानपुर के चारों सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया है। संगम एक्सप्रेस में यात्रियों की सुरक्षा के लिए जीआरपी कानपुर का एस्कार्ट चल रहा था। एस्कार्ट में हेड कांस्टेबल अजय पाल सहित कांस्टेबल अहमद अली, ओमवीर सिंह व रामनरेश डकैतों का मुकाबला करने के बजाय अपनी जान बचाते हुए नजर आए थे।

कोई एसी कोच में छिपा तो किसी ने टॉयलेट में शरण ली। एसएसपी इटावा दिनेश कुमार के सामने यात्रियों ने गुस्सा जाहिर करते हुए एस्कार्ट के सिपाहियों की कायराना हरकत की कहानी सुनाई थी। जीआरपी आईजी मुथा अशोक जैन ने मंगलवार को चारों सिपाहियों का पक्ष जाना।

दोषी पाते हुए उन्होंने चारों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। एसपी जीआरपी आगरा वजीह अहमद ने सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई होने की पुष्टि की।
विज्ञापन

हिम्मत दिखाते तो बरसा देते गोलियां

संगम एक्सप्रेस में चल रहा जीआरपी एस्कॉर्ट अगर जरा सी भी हिम्मत दिखाता तो वह लुटेरों पर गोलियों की बारिश कर सकते थे, क्योंकि ट्रेन में सवार यात्रियों ने बताया कि एस्कार्ट के सिपाहियों के पास ऑटोमैटिक गन इनसास थी।

इटावा जीआरपी के सिपाहियों से इनसास गन की खूबियों के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि इस गन में एक साथ 20 गोलियों को लोड किया जा सकता है।

ऑटोमैटिक मोड पर कुछ ही सेकेंड में बीस गोलियों को फायर करने की क्षमता इस गन में है। इस गन को अत्याधुनिक गन एके 47 के समकक्ष माना गया है। ट्रेन में चारों सिपाहियों के पास यही गन बताई गई है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें