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उत्तर प्रदेश चुनाव: क्या पूर्व नौकरशाहों को सियासी मैदान में उतारेगी भाजपा? यूं ही नहीं आया दुर्गा शंकर का नाम अखिलेश की जुबां पर

सार

उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि आप अगर पूर्वांचल की राजनीति को बहुत करीब से समझें तो एके शर्मा और वर्तमान मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा, दोनों एक ही जिले मऊ से आते हैं। दोनों की प्रशासनिक क्षमताओं पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। दोनों ही नेता भाजपा आलाकमान के बहुत करीबी भी हैं...
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दुर्गा शंकर मिश्रा और अखिलेश यादव - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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15 मार्च 2012 को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनते ही अखिलेश यादव ने सबसे पहला प्रशानिक फेरबदल यही किया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री दफ्तर के प्रमुख सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा को वेटिंग लिस्ट में डाल दिया था। अब वही दुर्गा शंकर मिश्र रिटायर होने से दो दिन पहले सूबे के सबसे बड़े प्रशानिक अधिकारी बनकर लखनऊ पहुंच चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरीके से अखिलेश यादव ने कन्नौज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दुर्गा शंकर मिश्र की बतौर मुख्य सचिव की नियुक्ति पर सवाल खड़े किये, उसे उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों से सीधे तौर पर जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में नवनियुक्त मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा और पूर्व आईएएस वर्तमान में एमएलसी एके शर्मा को लेकर भी तमाम कयासबाजी की जा रही हैं।

भाजपा की दूरगामी रणनीति

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में दुर्गाशंकर मिश्र की नियुक्ति पर चर्चाएं तो खूब हो रही हैं। समाजवादी पार्टी से जुड़े प्रदेश स्तर के एक नेता कहते हैं कि दरअसल भाजपा अंदर ही अंदर कूटनीतिक तरीके से अपना एक नया धड़ा तैयार कर रही है। जो प्रशासनिक क्षमताओं वाले बड़े लोगों को लेकर 2024 के चुनावों में एक नए रूप में सामने आएंगे। उनका कहना है कि दुर्गा शंकर मिश्रा की नियुक्ति और पूर्व आईएएस एके शर्मा उत्तर प्रदेश की राजनीति में एंट्री करवाने जैसी राजनीतिक घटनाएं और प्रशासनिक परिवर्तन को महज सामान्य परिवर्तन समझ कर नहीं देखना चाहिए। बल्कि इसे भाजपा दूरगामी रणनीति के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। उक्त नेता का दावा है जिस तरीके से दुर्गाशंकर मिश्र को एक साल का सेवा विस्तार दिया गया है उससे इस बात के कयास भी लगाए जा रहे हैं कि एक साल बाद 2023 में क्या उन्हें भी राजनीतिक मैदान में तो नहीं उतारा जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक इस बात को सिरे से खारिज नहीं करते हैं। वह कहते हैं कि ऐसा तो अकसर देखा ही जाता रहा है कि ब्यूरोक्रेट रिटायर होने के बाद या वीआरएस लेकर के राजनीतिक मैदान में आते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संभव है कि रिटायर होने के बाद मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा राजनीतिक पारी शुरू कर दें।

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उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि आप अगर पूर्वांचल की राजनीति को बहुत करीब से समझें तो एके शर्मा और वर्तमान मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा, दोनों एक ही जिले मऊ से आते हैं। दोनों की प्रशासनिक क्षमताओं पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। दोनों ही नेता भाजपा आलाकमान के बहुत करीबी भी हैं। ऐसे में अगर यह राजनैतिक कयास लगाए जा रहे हैं कि सिर्फ दुर्गा शंकर मिश्रा ही नहीं बल्कि कुछ अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सेवानिवृत्त होने के बाद 2024 में भाजपा में शामिल होते हैं तो कोई भी चौंकाने वाली बात नहीं होनी चाहिए।

अखिलेश ने नियुक्ति पर उठाए सवाल

दरअसल उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जब 15 मार्च 2012 को बतौर मुख्यमंत्री शपथ ली थी तो मायावती के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अधिकारियों का बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया था। उसी में दुर्गा शंकर मिश्रा को भी वेटिंग में डाल दिया गया था। कुछ समय बाद दुर्गा शंकर मिश्रा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली चले गए और जब वापस आए तो सूबे के सबसे बड़े अधिकारी बन कर। राजनीतिक विश्लेषक जेएन पाठक कहते हैं कि जिस तरीके से कन्नौज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने महज दो दिन बाद रिटायर होने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र को न सिर्फ उत्तर प्रदेश का मुख्य सचिव नियुक्त किए जाने बल्कि उन्हें एक साल के सेवा विस्तार दिए जाने पर सवाल उठाया है वह उस राजनेता के लिए चिंता का विषय स्वाभाविक भी है जिसने आज के मुख्य सचिव को सबसे पहले वेटिंग में डाल दिया हो। पाठक कहते हैं कि दरअसल चुनाव के दौरान ऐसी होने वाली पोस्टिंग खास तौर से सबसे ताकतवर पद पर होने वाली नियुक्ति से विपक्ष के नेता हमेशा घबराते रहते हैं। मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल उठाकर अखिलेश यादव ने अपनी इस चिंता को न सिर्फ जाहिर किया है बल्कि बहुत सारे सवाल भी खड़े कर दिए हैं। पाठक कहते हैं कानूनी तौर पर मुख्य सचिव की नियुक्ति पर अखिलेश यादव के उठाए गए सवाल कहीं स्टैंड नहीं करते हैं।

आपस में टकरा रहे डबल इंजन की सरकार के इंजन

शुक्रवार को कन्नौज में हुई प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने जब इस बात का जिक्र किया कि डबल इंजन की सरकार के इंजन ही आपस में टकरा रहे हैं, तो उसके भी कई मायने निकाले जाने लगे। हालांकि अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा जिस तरीके से 'उनके' भेजे गए एक अधिकारी को राज्य में मंत्री नहीं बनाया गया तो ऊपर से सूबे के सबसे बड़े अधिकारी को ही बदल दिया गया। उनका इशारा रिटायर्ड आईएस एके शर्मा के लिए था। अखिलेश यादव ने इशारों ही इशारों में कहा कि केंद्र के बड़े नेताओं और राज्य के बड़े नेताओं की आपस में बन नहीं रही है, इसीलिए यह सारी कवायदें की जा रही हैं।

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