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आए बिना ही यूपी की 'सियासत' में छा गए मोदी

Tue, 21 May 2013 08:28 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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लोकसभा चुनाव की घोषणा अभी नहीं हुई है। बड़े नेताओं के लड़ने के फैसले पर से भी रहस्य उठना बाकी है।
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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश कब आएंगे, यह भी अभी तय नहीं है। पर, मोदी यूपी की सियासत के केंद्र में आ गए हैं।

मुद्दा बने हैं, मोदी के नजदीकी अमित शाह जिन्हें भाजपा का प्रदेश प्रभारी घोषित किया गया है।

इसी के साथ भाजपा ने यह संदेश भी दे दिया है कि लोकसभा चुनाव में बाजी मारने के लिए पार्टी आक्रामक रणनीति पर काम करेगी और हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने में कोई परहेज नहीं करेगी।

मोदी की चर्चा सिर्फ भाजपाइयों के बीच ही नहीं बल्कि विपक्ष के बीच भी शुरू हो गई है।

कांग्रेस ने तो शाह के बहाने मोदी व भाजपा पर हमला भी बोल दिया है। शाह को प्रभारी बनाने के फैसले को गलत करार दिया है। साथ ही इसे सांप्रदायिकता फैलने की बात कही है।
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कांग्रेस विधान मंडल दल के पूर्व नेता प्रमोद तिवारी व प्रदेश की पूर्व अध्यक्ष डा. रीता बहुगुणा जोशी ने सोमवार को यहां कहा कि शाह को प्रभारी बनाना यूपी के लिए खतरे की घंटी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने एक से एक कुख्यात कारनामे करने वाले अमित शाह को यूपी का प्रभारी बनाकर सांप्रदायिकता फैलाने का काम किया है। इसका नतीजा भाजपा को भुगतना होगा।

तिवारी ने कहा कि उनकी ईश्वर व अल्लाह से यही प्रार्थना है कि यूपी में अमन-चैन बना रहे। जवाब में भाजपा प्रवक्ता विजय पाठक ने इसे कांग्रेस का अनर्गल प्रलाप और उनके भीतर मोदी के नाम का बैठा भय करार दिया है।

पाठक ने कहा कि कांग्रेस के पेट में मरोड़ क्यों हो रही है। रही बात शाह के प्रभारी बनने की तो वह संगठन के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं। इसलिए जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्यकर्ताओं में उत्साह आया है।

कांग्रेस को भाजपा की स्थिति के बारे में सोचने से पहले अपने बारे में सोचना चाहिए। उनके यहां तो एक नहीं अनेक कुख्यात चेहरे उजागर हो चुके हैं।

शाह को लेकर कांग्रेस व भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण साफ नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर देश में सपा और भाजपा ही दो ऐसे राजनीतिक राष्ट्रीय दल हैं जिनके बीच लोकसभा चुनाव में ज्यादातर राज्यों में सीधा मुकाबला होने की संभावना है।

शायद इसी वजह से डा. रीता बहुगुणा जोशी ने शाह के बहाने भाजपा पर हमला बोला है। सिर्फ कांग्रेस में ही नहीं भाजपा के भीतर भी शाह को लेकर हलचल कम नहीं है।

कार्यकर्ताओं से लेकर नेताओं तक के बीच इस बात की चर्चा है कि लोकसभा चुनाव में मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। लड़ाई हिंदुत्व के मुद्दे पर होगी। भले ही यह आरोप व प्रत्यारोप के रूप में हो या अन्य किसी स्वरूप में।
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भाजपा कार्यकर्ताओं व नेताओं का आकलन यूं ही नहीं है। इसकी वजह भी है। अमित शाह गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन मुठभेड़ कांड में आरोपी हैं।

इस मुठभेड़ से लेकर गोधरा कांड और दंगों के मुद्दों पर भाजपा विरोधी दल न सिर्फ मोदी बल्कि शाह पर निशाना साधते रहे हैं।

जाहिर है कि भाजपा ने यह जानते हुए शाह को यूपी में सक्रिय किया है कि विपक्ष की तरफ से उस पर हमले तेज होंगे। कांग्रेस ही नहीं सपा, बसपा जैसे दल भी भाजपा को मुस्लिम विरोधी करार देकर हमला बोलेंगे।

भाजपा भी शायद यही चाहती है। तभी तो भाजपा प्रवक्ता पाठक कहते हैं कि उत्तर प्रदेश राजनीतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

इस राज्य से 80 सांसद चुने जाते है। दिल्ली में सत्ता हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश से सांसदों की संख्या बढानी होगी।

प्रदेश से केंद्रीय नेतृत्व की अपेक्षाएं अधिक हैं। सपा सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण की सीमाएं तोड रही है। कांग्रेस व सपा को शाह  बेहतर जवाब दे सकते हैं।

शाह को प्रभारी बनाने का फायदा मिलेगा,क्योंकि सपा व कांग्रेस नेताओं पर गुजरात सिर चढ़कर बोल रहा है।
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