उन्नाव। आवेदकों को हलाल कर यूडीए लगातार मालामाल हो रहा है। यूडीए की आवासीय योजना भले ही खटाई में चल रही हो लेकिन इसके बाद भी यूडीए को इससे तगड़ा मुनाफा हो रहा है।
योजना की शुरुआत हुए बिना ही दो साल में आवेदकों से मिले लगभग 15 करोड़ रुपये से विभाग को एक करोड़ रुपये ब्याज के तौर पर एक मोटी रकम मिल रही है।
इतनी मोटी कमाई होेने के बाद भी विभाग की ओर से आवेदकों को पैसा वापसी में उनके मूलधन के अलावा एक धेला भी नहीं दिया जा रहा है।
उन्नाव-शुक्लांगज विकास प्राधिकरण (यूडीए) की बहु प्रतीक्षित निराला नगर आवासीय योजना फेज-2 के लिए नवंबर 2012 में आवेदन लिए गए थे। इसके 199 भूखंडों के लिए कुल 2444 लोगों ने आवेदन किया था।
आवेदन में जमा की जाने वाली भूखंडों की कीमत की 10 प्रतिशत पंजीयन राशि के रूप में भी आवेदकों ने यूडीए को दे दी थी। आवेदकों द्वारा जमा की गई कुल राशि लगभग 15 करोड़ को पार कर गई थी। इस राशि को विभाग की ओर से विभागीय खाते में जमा करवाया गया था।
इसके बाद ही कुछ किसानों द्वारा योजना की भूमि के अधिग्रहण को गलत ठहराते हुए कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया गया जो आज भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। योजना के कोर्ट में जाने के बाद यह ठंडे बस्ते में चली गई और कोर्ट में तारीख पे तारीख का सिलसिला चलने लगा।
इसी के चलते यूडीए के खाते में जमा आवेदकों का रुपया भी दिन-रात बढ़ता रहा। मौजूदा समय में आवेदकों द्वारा लगभग 40 प्रतिशत रुपये वापस ले लेने के बाद भी विभाग को 1 करोड़ से अधिक ब्याज इस रुपये से मिल चुका है।
आवेदकों के दिखाया जा रहा ठेंगा
उन्नाव। एक ओर यूडीए को आवेदकों के रुपयों से मोटा ब्याज मिल रहा है। लेकिन विभाग से इस योजना में लगाया गया अपना पैसा वापस लेने वाले आवेदकों को विभाग की ओर से सिर्फ उनका मूलधन वापस कर ठेंगा दिखा दिया जा रहा है।
इस योजना में आवेदन करने वाले लगभग एक हजार लोगों ने अपना मूलधन वापस ले लिया है जो कि लगभग 7 करोड़ रुपये है। इसके अलावा यूडीए के पास अभी भी आवेदकों के 8 करोड़ रुपये उसके खाते में जमा हैं और विभाग को मोटी रकम ब्याज के तौर पर दिला रहा है।