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संसाधन मिलें तो निखरें खेल प्रतिभा

Mon, 29 Aug 2016 12:27 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
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खेल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिले में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए शासन व प्रशासन स्तर पर किए जा रहे प्रयास नाकाफी हैं। खेल विभाग से जुड़े अधिकारी व अन्य जिम्मेदारों की अनदेखी से खेल प्रतिभाएं अपना हुनर दिखाने का मौका नहीं मिल रहा। जमीनी हकीकत यह है कि जिले में कई प्रतिभाएं ऐसी हैं, जिन्हें मौका मिले तो वह प्रदेश, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक अपना लोहा मनवा सकती हैं। कुछ प्रतिभाएं अपने दम पर प्रदेश स्तर तक पहुंची भी लेकिन जरूरी प्रशिक्षण न मिलने से वह कुछ खास नहीं कर सके। जिले में उपयुक्त ग्राउंड व पर्याप्त संसाधन न होने से खिलाड़ी मायूस हैं। खिलाड़ी अपने होम ग्राउंड पर ही प्रैक्टिस कर मजबूरी में अपने को सिमटता हुआ देख रहे हैं।
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परिचय-अर्पित कुशवाहा।
बीज भंडार संचालक सिविल लाइंस निवासी महेंद्र सिंह कुशवाहा के पुत्र अर्पित ने प्रदेश स्तरीय अंडर-16 क्रिकेट टीम में सिलेक्शन होने के बाद भी खुद को होम ग्राउंड तक ही समेट लिया है। अर्पित का कहना है कि वह एक अच्छा आलराउंडर है और जिले के अलावा स्टेट लेवल पर भी खेल चुका है। पर्याप्त संसाधन मुहैया न हो पाने से अब स्थानीय स्तर पर ही खेलने को मजबूर है। वह मई 2016 में ही अंडर-16 क्रिकेट में अपना हुनर दिखा चुका है।

प्रतिभा -2
फोटो नंबर-6
परिचय-मो. नबी।
डेयरी मालिक दरोगा बाग निवासी मेहंदी हसन के बेटे मो. नबी मीडियम फास्ट बालर हैं और अपनी गेंदबाजी के बूते जिले के अलावा जोनल स्तर पर क्रिकेट खेल चुके हैं। मो. नबी ने अपनी धुआंधार गेंदबाजी से जोनल स्तर के कई बैट्समैनों को धूल चटाई है। इसके बावजूद उन्हें इससे आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल सका। अब फिलहाल वह बीकॉम की पढ़ाई कर जिलास्तरीय क्रिकेट में ही हाथ आजमा रहे हैं।
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परिचय-सैय्यद इब्ने हैदर।
शहर के चौधराना निवासी सैय्यद इब्ने हैदर पुत्र शादाब आलम जैदी जून 2016 को कानपुर के कमला क्लब में हुई अंडर-19 प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड से खेलने वाले टॉप 140 खिलाड़ियों मेें अपना नाम लाकर जिले का नाम रोशन किया है। लेकिन जिले भर में राष्ट्रीय स्तर की टर्फ विकेट न होने से वह इससे आगे नहीं निकल सका। इसके बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी है। अब लखनऊ में प्रैक्टिस कर अपने को आगे ले जाने और जिले का नाम ऊंचा करने का मन बनाया है।

परिचय-प्रतिभा भारतीय।
जिले में खेल को आगे बढ़ाने में महिला खिलाड़ियों के प्रयास भी कमतर नहीं हैं। इसी क्रम में आवास विकास कालोनी निवासी कमलाकांत भारतीय की बेटी प्रतिभा भारतीय ने महिला क्रिकेट में स्टेट लेवल की जूनियर व सीनियर प्रतियोगिताओं में कई अवार्ड अपने नाम किए हैं। वह छह बार स्टेट लेवल की प्रतियोगिताओं में खेल चुकी हैं। अभी भी वह खेल में अपने को और आगे ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। बस स्थानीय स्तर संसाधनों की कमी आड़े आ रही है।


खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा अन्य जिलों जैसा माहौल
पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी व कोच राजेंद्र नाथ की मानें तो जिले के खिलाड़ियों को कानपुर व लखनऊ आदि जिलों जैसा माहौल नहीं मिल रहा है। जिले के किसी भी ग्राउंड में प्रदेश स्तरीय टर्फ विकेट नहीं है। वहीं खेल विभाग के अधिकारी भी उनकी खेल प्रतिभा को उभारने में मदद नहीं कर रहे हैं।

बदहाल पड़ा है जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम
जिले का सबसे बड़ा व सभी संसाधनों से लैस कहा जाने वाला शहर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय स्पोर्ट्स स्टेडियम मौजूदा समय में पूरी तरह से बदहाल हो चुका है। विभागीय अफसर सिर्फ अपनी ड्यूटी पूरी करने से मतलब रखते हैं और खिलाड़ियों की किसी भी असुविधा से उनका कोई लेना देना ही नहीं रहता है।

स्टेडियम स्तर पर उपलब्ध कराई जाती हैं सभी सुविधाएं
स्टेडियम में प्रैक्टिस करने को आने वाले सभी खिलाड़ियों को स्टेडियम स्तर पर मिलने वाली सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। विभाग में बजट की कमी के चलते अधिक संसाधन नहीं हैं। सुधीर कुमार श्रीवास्तव, उप क्रीड़ाधिकारी, जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम।
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