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सरकारी सहायता के बिना बना लिए जुगाड़ के टायलेट

Tue, 18 Oct 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो उन्नाव
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करौंदी के मजरे भगवतपुर में ग्रामीणों ने बनाए जुगाड़ के टायलेट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विकासखंड सिकंदरपुर करन की ग्राम पंचायत करौंदी के मजरे भगवतपुर के ग्रामीण स्वच्छता के प्रति जागरूक हैं। खुल में शौचमुक्त को एक अभिशाप मानने वाले ग्रामीणों ने बिना किसी सरकारी सहायता के अपनी स्थिति के अनुसार जुगाड़ का टायलेट बना लिया और उसका प्रयोग भी कर रहे हैं।
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वर्तमान समय में शासन, प्रशासन ने हर गांव को खुले में शौचमुक्त करने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए गांव-गांव शौचालय निर्माण के लिए पैसा दिया जा रहा है। प्रशासन के दावों की मानें तो अभी तक जिले में छह गांवों को खुले में शौचमुक्त घोषित किया जा चुका है। वहीं लक्ष्य 100 गांवों को खुले में शौचमुक्त करने का है। कई गांवों में तो लोगों ने सरकारी मदद से शौचालय भी बनवा लिए इसके बाद भी खुले में शौच करना नहीं छोड़ा हैं।

वहीं इसके विपरीत सिकंदरपुर करन ब्लाक की ग्राम पंचायत करौंदी का छोटा मजरा है भगवतपुर। यहां के लोग खुले में शौचमुक्त अभियान से इस कदर प्रभावित हैं कि बिना सरकारी मदद के जुगाड़ की व्यवस्था से शौचालय बनवा लिए हैं। पक्की दीवारें न होने के एवज में ग्रामीणों ने शौचालयों के ईद-गिर्द टाटपट्टी लगाकर आड़ कर लिया है। साथ ही कच्चा गड्ढा खोद रखा है। गांव में ऐसे जुगाड़ के एक नहीं बल्कि 65 बने हुए हैं। इस मजरे में इतने ही परिवार हैं और सभी ने अपने घरों में इसी तरह के शौचालयों का निर्माण करा रखा है।
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सहायता मिली तो पक्के  भी बनेंगे शौचालय
भगवतपुर निवासी रामाधार, राकेश, कौशिल्या, रामप्रसाद आदि ने बताया बारिश या सर्दियों में खुले में शौच जाना बड़ा ही जोखिम भरा होता है। बड़े लोग तो जैसे-तैसे खुले में हो भी आते हैं, लेकिन बच्चे व महिलाओं के लिए यह मुश्किल था। इसी कारण उन लोगों को इस तरह का कदम उठाया। इन लोगों का कहना है यदि जिला प्रशासन तक उनकी आवाज पहुंचेगी तो निश्चित रूप से उन लोगों को पक्के   शौचालयों के निर्माण के लिए सरकारी सहायता  मिलेगी। यदि नहीं मिली तो किसी तरह से मेहनत-मजदूरी करके पक्का शौचालय बनवा लेंगे।
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