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जिले भर में पानी का जबरदस्त संकट

Mon, 25 Apr 2016 12:34 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
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जल संकट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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असोहा ब्लाक से जुड़ी ग्राम पंचायतों की संख्या 67 हैं। इन गांवों में करीब 2 लाख की आबादी है। क्षेत्र से जीवनदायिनी सईं नदी की एक धारा निकली हुई है जो भीषण गर्मी में सूखने के कगार पर है। वर्तमान समय में गर्मी के तेज प्रकोप से सईं नदी की धारा लगभग सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है। इसके अलावा ब्लाक क्षेत्र मेें लगी लगभग एक दर्जन टंकियों में एक-दो को छोड़कर ज्यादातर बंद पड़ी हैं या फिर आंशिक रूप से चालू हैं। असोहा में लगभग 28 नलकूप किसानों की सिंचाई सुविधा के लिये लगाए गए थे, लेकिन यह भी मौजूदा समय में दुर्दशा के शिकार हैं। ब्लाक क्षेत्र में लगे हैंडपंपों में 33 खराब पड़े हुए हैं। तालाब पूरी तरह से सूखे हैं। कुएं में पानी नहीं है। ऐसे में दो लाख की आबादी को भीषण पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है। विकासखंड के इस्लामनगर, नेवादा, भाऊमऊ, चौपाई, बिलौरा, डुडियाथर, गोमापुर, चिलौली, ओगरापुर, पहाड़पुर, दरेहटा, लच्छीपुर, गोसाईखेड़ा और सेमरी में लगे नलकूपों में एक-दो ही चल रहे हैं। शेष लंबे समय से बंद है। हालांकि विभाग इन्हें कागजों पर चालू दिखा रहा है।
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इंसेट-1
फर्जी रिपोटिंग पर नोडल अफसर ने लगाई थी फटकार
जिले के नोडल अधिकारी व सचिव जल संसाधन धीरज साहू ने निरीक्षण में नलकूपों को बंद पाया था जबकि अभिलेखों में चालू दिखाए जाने पर उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई थी। इसके बाद भी आज तक ब्लाक क्षेत्र में लगे नलकूपों को विभागीय अधिकारियों ने चालू कराने का प्रयास नहीं किया। क्षेत्र के सतीश अग्निहोत्री, ललित, सुरेंद्र, प्रियांशु, महेश, दिलीप, धनंजय, दीपक, गुड्डू, निखिल, पुनीत, अमित आदि ने बताया कि नलकूपों वर्षों से बंद पड़े हैं। बिजली भी समय से नहीं आती और मोटरें फुंकी हैं। वहीं शारदा नहर के मौरावां ब्रांच में पिछले चार वर्षों से पानी न आने के कारण क्षेत्र के किसान पानी के लिये तरस रहे हैं। पानी न आने से इसके आसपास के जलाशय भी सूख गए हैं। कल्लू यादव व प्रधान धर्मेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि यह पहला मौका है जब सईं नदी भी सूख गई है। समाजसेवी ओमप्रकाश सिंह ने कई बार मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को पत्र भेजा लेकिन परिणाम शून्य निकला।

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फोटो 10-कांथा गांव का सूखा पड़ा मॉडल तालाब।
डीएम के गोद लिए गांव में भी जलसंकट
क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत कांथा को डीएम ने कुपोषणमुक्त करने के लिए गोद ले रखा है। इसके बाद भी यह गांव भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है। जिस तालाब के जीर्णोंद्धार के लिए डीएम ने फावड़ा चलाया था उसमें एक बूंद पानी नहीं है। गांव के लगभग सभी जलाशय पूरी तरह से सूख चुके हैं। पशु-पक्षियों तक को पानी नसीब नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्हें शुद्ध पानी ही नसीब नहीं होगा तो गांव कुपोषणमुक्त कैसे होगा।
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