रिटायर्ड आईआएस सूर्य प्रताप सिंह के गंगा मे बहती लाशों की सात साल पहले की फोटो को अभी का बता कर ट्वीट करने के मामले में दर्ज हुए मुकदमें में मंलगवार को उनसे पूछताछ हुई। पुलिस से नोटिस मिलने के बाद सोहरामऊ थाने मे मंगलवार दोपहर विवेचक को जवाब देने पहुचे रिटायर्ड आईआएस सूर्य प्रताप सिंह ने कहाकि ट्वीट का मकसद सरकार को आईना दिखाना था। हिंदू रितिरिवाज के अनुसार शवो का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए था।
जांच अधिकारी के सवाल-जवाब
आईओ- ट्वीट आपके एकांउट से आपके द्वारा पोस्ट हुआ
रिटायर्ड आईएएस - हां
आईओ – फोटो पेस्ट करने का मकसद क्या था
रिटायर्ड आईएएस- वायरल फोटो 2014 का बलिया जिले का था। जो कि पोस्ट करते समय प्रतीकात्मक लिखा था,वैसे भी गंगा मे लाशो के उतराने का सिलसिला जारी था, इसको लेकर कई बड़े अखबारो व चैनलो ने खबरे भी प्रकाशित की है। किसी की भावना को ठेस पहुंचाना मकसद नही था। फिर भी सरकार को ऐसा लगा तो वायरल ट्वीट को डिलीट कर दिया था। कहाकि ट्वीट को मकसद सरकार को आईना दिखाना था। हिंदू रितिरिवाज के अनुसार शवो का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए था।
मैं पिछले पांच सालो से सोशल मीडिया के माध्यम से सरकारो को जगाने काकाम कर रहा हूं। मेरा कोई व्यक्तिगत मकसद नही था। मै अखिलेश सरकार मे भी जनहित से जुड़ी कई पोस्ट वायरल कर चुका हूं। लेकिन इस सरकार मे मेरे ऊपर लखनऊ मे 2,कानपुर में 1,वाराणसी मे 1,कासगंज में 1 व उन्नाव में 1 कुल मेरे पूर्व 6 मुकदमे लाद दिए गए। वैसे मुकदम से डरने वाला नही हूं।