ग्राम पंचायतों में लाखों की लागत से कराए गए विकास कार्यों में गड़बड़ी की 36 शिकायतें डंप हैं। जांच के लिए नामित अधिकारियों ने अभी तक रिपोर्ट नहीं दी है।
ग्राम पंचायतों में विकास के लिए पंचायतीराज विभाग विभिन्न मदों में धनराशि आवंटित करता है। इसमें राज्य वित्त, 13वां वित्त (वर्तमान में 14वां वित्त) से पंचायतों को भारीभरकम बजट दिया गया।
इससे गांवों में नाली, खड़ंजा, सीसी रोड, इंटरलॉक मार्ग जैसे विकास कार्य कराए जाते है। पुरानी संपतियों का रखरखाव भी होता है। हालांकि अधिकांश ग्राम पंचायतों में सरकारी धन के बंदरबांट की शिकायतें रहती हैं।
पिछले तीन सालों में प्रधानों और पंचायत सचिवों पर सरकारी धन के गबन की 36 शिकायतें जिला प्रशासन के पास पहुंची। प्रशासन ने भ्रष्टाचार की जांच के लिए जिलास्तरीय अधिकारियों की टीमें गठित कर दीं लेकिन कार्रवाई तो दूर जांच तक नहीं हुई।
मियागंज विकासखंड के गांव पूरनखेड़ा मजरा हिम्मतखेड़ा निवासी राजेश कुमार ने जिलाधिकारी ने विकास और निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत की थी। डीएम ने 16 जुलाई 2016 को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी और सहायक अभियंता डीआरडीए की टीम गठित करके जांच के निर्देश दिए थे। फिर भी जांच नहीं हुई। पंचायतीराज विभाग ने 20 जून 2019 को जांच आख्या के लिए रिमाइंडर भेजा लेकिन यह भी डंप हो गया।
फतेहपुर चौरासी विकासखंड की ग्राम पंचायत हयासपुर निवासी स्वामीशंकर यादव ने 23 नवंबर 2016 को जिलाधिकारी को पत्र देकर गांव में हुए विकास कार्यों की जांच की मांग की थी।
डीएम ने उसी दिन बीएसए व सहायक अभियंता डीआरडीए की टीम गठित करके एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट तलब की थी। तीन साल बीत गए लेकिन अभी तक जांच नहीं हो सकी। पंचायतीराज विभाग ने रिमाइंडर भी भेजा लेकिन अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
बेसिक शिक्षाधिकारी सात, उपायुक्त एनआरएलएम दो, आरईएस अधिशाषी अभियंता दो, डीआईओएस एक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी तीन, महाप्रबंधक उद्योग एक, जिला कृषि अधिकारी दो, जिला विकास अधिकारी एक, भूमि संरक्षण अधिकारी दो, उद्यान अधिकारी दो, लघु सिंचाई एक, जलनिगम एक्सईएन एक, पीओ नेडा एक, कृषि रक्षा अधिकारी तीन, वन अधिकारी चार, समाज कल्याण व युवा कल्याण अधिकारी एक-एक और सहायक अभियंता डीआरडीए एक
जांच में लापरवाही करने वाले अधिकारियों की सूची तलब की जाएगी। लंबे समय से फाइलें डंप रखने और जांच करके समय से रिपोर्ट नहीं देने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डॉ. राजेश कुमार प्रजापति, मुख्य विकास अधिकारी