उन्नाव में रामायण कालीन सई नदी के जीर्णोद्धार की कवायद शुरू हो गई है। मनरेगा से होने वाले सुंदरीकरण कार्य से पहले सिंचाई विभाग की मदद से नदी के तट की मैपिंग कराई जा रही है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नदियों को स्वच्छ व निर्मल बनाने के लिए नमामि गंगे योजना शुरू की थी। पहले चरण में गंगा को शामिल किया गया था। दूसरे चरण में सई नदी को लिया गया था।
जिला प्रशासन ने जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी मनरेगा उपायुक्त को सौंपी है। उपायुक्त राजेश कुमार झा ने बताया कि मनरेगा से नदी का वास्तविक स्वरूप लौटाने की कार्ययोजना पर काम शुरू किया गया है। मैपिंग के जरिये नदी के वास्तविक क्षेत्रफल की जानकारी हो सकेगी। अतिक्रमण हटाकर नदी के बंधे चौड़े किए जाएंगे। किनारों पर पौधे रोपित किए जाएंगे जो नदी की सुंदरता बढ़ाएंगे।
सैकड़ों गांवों के लिए जीवनदायिनी थी नदी
हरदोई जिले से निकली सई नदी उन्नाव के कस्बा औरास व मोहान के बगल से होते हुए लखनऊ, रायबरेली और प्रतापगढ़ जिलों को पार कर जौनपुर जिले में गोमती नदी में मिली है। कभी यह नदी सैकड़ों गांवों के लोगों के लिए जीवनदायिनी थी। सैकड़ों एकड़ फसल की सिंचाई होती थी। सफाई व संरक्षण के अभाव में नदी का दायरा सिमटता जा रहा। नदी नाले के रूप में तब्दील होने लगी है।