उन्नाव। जनपद के किसानों के लिए छुट्टा मवेशी सिरदर्द बने हुए हैं। प्रशासन के लाख दावों के बाद भी छुट्टा मवेशियों की धमाचौकड़ी कम नहीं हो रही है। फसलों को बचाने के लिए खेतों पर डेरा जमाने वाले किसानों का धैर्य भी जवाब देने लगा है।
गंजमुरादाबाद
पड़ोसी जनपद हरदोई से उन्नाव जनपद की सीमा में छुट्टा जानवरों के खदेड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार की भोर पहर मल्लावां के दर्जनों किसान गंजमुरादाबाद में एक्सप्रेसवे के निकट भारी संख्या में छुट्टा जानवर खदेड़ कर चले गए। कई स्थानों पर कंटीले तारों की बनी बैरीकेडिंग टूटी होने के कारण ये छुट्टा जानवर लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर पहुंच गए। वैसे क्षेत्र की 10 गोशालाओं में 1363 गोवंश संरक्षित हैं। इसके बाद भी खुले में विचरण करने वाले मवेशियों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। सहायक विकास अधिकारी पंचायत धर्मदास ने बताया कि मल्लावां के किसान लगातार इस क्षेत्र में छुट्टा जानवर खदेड़ रहे हैं। क्षेत्र की सभी गोशालाएं भरी हैं। ऐसे में दूसरे जनपद से आए मवेशियों के रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा है। मल्लावां के अधिकारियों से जल्द बात कर इस समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
बांगरमऊ
फतेहपुर चौरासी क्षेत्र से ग्रामीणों द्वारा शनिवार देर शाम छुट्टा मवेशियों को बांगरमऊ के पास छोड़ दिया गया। आसपास के गांवों के किसानों ने देररात जानवरों को पकड़ कर ग्राम फरीदपुर कट्टर में बने विद्यालय के गेट का ताला तोड़कर अंदर बंद कर दिया। खंड विकास अधिकारी अभिनव सरोज मौके पर पहुंचे और विद्यालय प्रांगण में बंद आधा सैकड़ा गोवंशों को ग्राम खैरुद्दीनपुर व भिखारीपुर गोशाला में भिजवाया।
सफीपुर
शनिवार से लेकर रविवार तक गहोली, फाजिलपुर के किसानों ने फाजिलपुर स्थित अंबेडकर पार्क में 80 पशुओं को बंद कर दिया था। रविवार को सभी पशु रहीमाबाद आश्रय स्थल ले जाए गए। जहां मौजूद ग्रामीणों ने पशुओं को उतारने से मना कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि आश्रय स्थल में रहीमाबाद के आसपास के छुट्टा पशुओं के लिए जगह नहीं है। ऐसे में अन्य क्षेत्र के यहां लाए गए मवेशियों को कहां रखा जाएगा। यही समस्या 10 दिन पूर्व खरगौरा, महमूदपुर, लहबरपुर गांव की गोशाला में आई थी। मिर्जापुर के स्कूल में बंद मवेशियों को ले जाने पर ग्रामीणों ने उतरने नहीं दिया था। देरशाम भी दो गाड़ियों को ग्रामीणों ने वापस कर दिया। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसके चौरसिया ने बताया कि रहीमाबाद आश्रय स्थल का गेट कमजोर था जिससे पशु निकल जाते थे। दूसरा मजबूत गेट लगवाया जा रहा है। पशु संरक्षित कराने के लिए ग्रामीण राजी हो गए हैं।
सोनिक
मुर्तजानगर में कानपुर-लखनऊ हाईवे किनारे एक अस्थायी रूप से बांस बल्ली लगाकर करीब दो हजार मवेशी बंद कर दिए गए। इन मवेशियों को चारा, पानी न दिए जाने की सूचना मिलने पर एसडीएम सदर सत्यप्रिय सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने यहां पर संरक्षित मवेशियों की गणना कराई। साथ ही पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को देने की बात कही।
नवाबगंज
शारदा नदी की आसीवन मौरावां नहर ब्रांच के सुंदरपुर मकूर मार्ग के रेगुलेटर के पास दर्जनों मृत मवेशियों के शव सड़ने से उठी दुर्गंध से ग्रामीणों का उस मार्ग पर निकलना मुश्किल हो गया। ऊसरहा गांव निवासी सुशील, विनोद, राजन, नमन तिवारी, अमन, राजेश शुक्ला, अनुज यादव व राज ने आरोप लगाया कि आसपास के क्षेत्र में बने गो आश्रय केंद्र में जो मवेशी भूख-प्यास व बीमारी से मर जाते हैं। उन मवेशियों को मौका पाकर नहर में फेंक दिया जाता है।