उन्नाव। विशेष न्यायाधीश (एसटी/एससी एक्ट) अंकिता शुक्ला के न्यायालय ने साल 2019 के सामूहिक दुष्कर्म मामले में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। पीड़ित महिला ने न्यायालय में पूर्व के बयान बदल दिए थे। अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ दोष साबित करने में विफल रहा। न्यायालय ने बयान बदलने वाली महिला और एक गवाह पर बीएनएसएस 2023 की धारा 383 के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज कर नोटिस देने का आदेश दिया है।
यह मामला बीघापुर थाना क्षेत्र के एक गांव का है। महिला ने चार फरवरी 2019 को पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र दिया था। इसमें उसने मगरायर गांव निवासी गनी मोहम्मद और सुंदरलाल पर तमंचा लगाकर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। महिला ने जातिसूचक गालियां देने और जान से मारने की धमकी का आरोप भी लगाया था। थाना पुलिस ने पहले मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में पुलिस अधीक्षक के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया था।
मुकदमे की सुनवाई विशेष न्यायाधीश अंकिता शुक्ला के न्यायालय में चल रही थी। सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अपने आरोपों को पुलिस के दबाव और बहकावे में लगाने की बात कही। दूसरे गवाह ने भी ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से इन्कार कर दिया। पत्रावली में संलग्न मेडिकल रिपोर्ट में भी पीड़िता के शरीर या नाजुक अंग में चोट की पुष्टि नहीं हुई थी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश अंकिता शुक्ला ने गनी मोहम्मद और सुंदरलाल धानुक को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। न्यायालय को भ्रमित करने और बयान बदलने के कारण पीड़िता पर कार्रवाई का आदेश दिया गया। गवाह के खिलाफ भी बीएनएसएस 2023 की धारा 383 के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।