उन्नाव। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य और तीन महीने की फुटेज सुरक्षित रखने के नियम पर विक्रेताओं ने ऐतराज जताया है। दवा विक्रेता वेलफेयर एसोसिएशन ने औषधि निरीक्षक के माध्यम से केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को मांगपत्र भेजकर पुनर्विचार की मांग की है।
एसोसिएशन अध्यक्ष मयंक वाजपेई ने औषधि निरीक्षक अशोक कुमार को पत्र सौंपा है। बताया कि कैमरा लगने से मरीजों की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है। खासकर टीबी, मानसिक रोग, यौन स्वास्थ्य और गर्भनिरोधक जैसी संवेदनशील दवाएं खरीदने वाले मरीज संकोच करेंगे। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरा, डीवीआर लगवाने के एवज में छोटे दुकानदारों पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती और खराब इंटरनेट के कारण रिकॉर्डिंग रुकने पर लाइसेंस रद्द होने का डर बना रहेगा। संगठन का तर्क है कि कैमरा केवल काउंटर लेनदेन रिकॉर्ड कर सकता है, डॉक्टर के पर्चे की वैधता सत्यापित नहीं कर सकता। एसोसिएशन ने व्यावहारिक विकल्प तलाशने की अपील की है।