उन्नाव। जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू को लेकर अब डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी सतर्क नजर आ रहे हैं। बुधवार तक कई डॉक्टर बिना मास्क मरीजों का इलाज कर रहे थे। संवाद न्यूज एजेंसी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था । इसके बाद डॉक्टरों ने मास्क पहनना शुरू कर दिया है।
स्वाइन फ्लू संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, खांसने, छींकने से फैलती है। खासकर भीड़-भाड़ वाली जगहों पर संक्रमण के प्रसार का खतरा अधिक होता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से मास्क लगाने की अपील की थी। इसके बावजूद जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर मास्क से परहेज कर रहे थे। इससे न सिर्फ उनमें बल्कि मरीजों में भी संक्रमण फैलने का खतरा था।
फतेहपुर में डॉक्टरों के संक्रमित होने के बाद जिला अस्पताल में बरती जा रही लापरवाही को संवाद न्यूज एजेंसी ने प्रमुखता से उठाया। इसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने मास्क पहनना शुरू कर दिया है। सीएमएस डॉ. एसके शुक्ला ने बताया कि सभी डॉक्टरों से मास्क लगाने की अपील की है। इससे मरीज भी जागरूक होंगे और मास्क लगाएंगे।
फोटो-18- इमरजेंसी वार्ड में भीड़। संवाद
तीमारदार अभी भी कर रहे नजरअंदाज
इमरजेंसी वार्ड में मरीज के बेडों पर भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। इमरजेंसी वार्ड में तीमारदारों की भीड़ रहती है। मरीजों के बेड पर बैठकर खाना-नाश्ता करना और सोना आम बात है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञ स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए भीड़भाड़ वाले स्थानों, यात्रा के दौरान और अस्पताल जाते समय एन-95 या सर्जिकल मास्क लगाने की सलाह देते हैं। इसके बावजूद अस्पताल में लोग बिना मास्क नजर आ रहे हैं।
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में 1583 लोगों ने पंजीकरण कराया। इमरजेंसी में पहुंचे 52 मरीजों में छह वायरल से पीड़ित मिले। सीएमएस डॉ. सुनील कुमार शुक्ला ने बताया कि डॉक्टरों, मरीजों और तीमारदारों को भी मास्क पहनने के लिए जागरूक किया जा रहा है। आवश्यकता हुई तो विभाग की ओर से भी मास्क उपलब्ध कराए जाएंगे।
फोटो-16-9 सितंबर को प्रकाशित खबर।
फोटो-16-9 सितंबर को प्रकाशित खबर।