फोटो-14- जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक बेड पर भर्ती दो मरीज। संवाद
उन्नाव। मरीजों की संख्या बढ़ने से इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्थाएं बदहाल होती जा रही हैं। बेड उपलब्ध न होने से उमस भरी गर्मी में दो-दो मरीजों को एक साथ लिटाकर उपचार किया जा रहा है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा तेजी से बढ़ा है।
बारिश और उमस के कारण संक्रामक बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉक्टर गंभीर मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में उपचार के लिए भर्ती कर रहे हैं। हालांकि मरीजों की बढ़ती संख्या 30 बेड के इमरजेंसी वार्ड के लिए नाकाफी साबित हो रही है। इन दिनों अक्सर इमरजेंसी वार्ड में बेड फुल चल रहे हैं। इससे यहां तैनात स्टाफ एक बेड पर दो मरीजों को लिटाकर उपचार देने को मजबूर हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम बेहद खतरनाक है। मरीजों के बीच बहुत कम दूरी रहने से खांसी, छींक, सांस की बूंदों और संक्रमित सतहों के माध्यम से बीमारी एक से दूसरे तक पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है। विशेष रूप से बुखार, सांस संबंधी रोग, टीबी, वायरल संक्रमण, त्वचा रोग और पेट संबंधी संक्रमण से पीड़ित मरीजों को अलग-अलग बेड पर रखा जाना चाहिए। एक ही बिस्तर, चादर, तकिया व चीजों का साझा उपयोग करने से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से फैल सकते हैं। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीज और बीमार हो सकते हैं।