बीघापुर। तहसील क्षेत्र के बिहार कस्बे के राधागंज मोहल्ले में समाजसेवी मुनीम लोधी की प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस दौरान काव्य संध्या में कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
काव्य संध्या का शुभारंभ कवयित्री रेखा पांडेय की वाणी वंदना से हुआ। कवि अनुज तिवारी ने पर्यावरणीय क्षति पर व्यंग्य करते हुए पढ़ा, ‘कुंज बने अब पत्थर के तो कुंज बिहारी कैसे आए? सरपट रपटीली हैं राहें कंक्रीट के जंगल छाए। सघन कुंज अब दूभर हो गए ,कान्हा कैसे रास रचाए’?
कवि योगेंद्र ने पिता पर कविता पढ़ते हुए कहा, ‘तुलना नहीं है कोई और ना कोई माप है, देवत्व से भी श्रेष्ठ पिता का प्रताप है’। इसके अलावा कवि मनोज सरल, संजीव तिवारी, पिंटू काका, डॉ. अयोध्या प्रसाद सुमन, दिलीप पांडेय व चंद्रकांत बाजपेई ने भी काव्य पाठ किया। आयोजक जयविंद, गोपाल व आनंद ने कवियों प्रतीक चिन्ह व अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।अध्यक्षता वरिष्ठ कवि चंद्रकांत बाजपेई ने की।