फोटो-16-नसीरापुर में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के निकट मूंग की फसल की निराई-गुड़ाई करते श्रमिक। संव
गंजमुरादाबाद। ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्त उड़द और मूंग की फसलें 10 दिन बाद फिर खड़ी हो गईं। इससे किसानों ने राहत की सांस ली है।
क्षेत्र के क्षेत्र के सुल्तानपुर, लहरापुर, देवरिया, कपूरपुर, ताजपुर, हसनापुर, तहिरापुर, हैबतपुर, नसीरापुर, नेवल, जगटापुर, रघुरामपुर आदि गांवों में किसानों ने बड़े पैमाने पर उड़द और मूंग की फसल बोई है। आठ अप्रैल को तेज हवा और बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई थी। इससे उड़द और मूंग की फसलें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। मौसम साफ होने के बाद क्षतिग्रस्त फसलें धीरे-धीरे फिर से खड़ी होने लगीं। ये फसलें अब लहलहाने लगी हैं। किसान अब इन फसलों की निराई-गुड़ाई तेजी से करा रहे हैं।
कृषि सलाहकार देवी सिंह ने बताया कि मूंग और उड़द की खेती बहुत आसान है। इसमें प्रति बीघा मात्र पांच हजार रुपये की लागत आती है। इसकी केवल एक या दो सिंचाई करनी होती है। बुवाई के एक माह बाद खरपतवार नष्ट करने के लिए निराई-गुड़ाई जरूरी है। फसल में कीट या रोग न लगें, इसके लिए देखरेख भी जरूरी है।
गंजमुरादाबाद। ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्त हुई उड़द और मूंग की पौध 10 दिन बाद अब फिर खड़ी हो गई है। इससे किसानों ने राहत की सांस ली है। किसान अब फसल की निराई व गुड़ाई में जुट गए हैं।