फोटो-8- तकिया मेला में आयोजित लोकगीत कार्यक्रम में आल्हा गायन करते रायबरेली के गायक राजकुमार या
- फोटो : reasi news
बीघापुर। तकिया मेले के दूसरे दिन शुक्रवार को चहल पहल रही। श्रोताओं ने आल्हा गायन का आनंद लिया। अग्निशमन विभाग की टीम ने मेलाे में लगी दुकानों का निरीक्षण लोगों को आग लगने की घटनाओं से बचाव के तरीके बताए।
तकिया मेले के शुभारंभ के दूसरे दिन लोक गायन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। रायबरेली से आए आल्हा गायक राजकुमार यादव ने वीर रस से ओतप्रोत माड़व की लड़ाई सहित अन्य प्रसंग प्रस्तुत कर श्रोताओं को वाहवाही लूटी। वहीं मेला की तैयारियों को लेकर प्रशासन भी अलर्ट है।
शुक्रवार को बीघापुर अग्निशमन केंद्र प्रभारी अरुण कुमार त्रिपाठी ने टीम के साथ मेले में लगी खाद्य सामग्री खजला (खाजा), चाट, मिठाई आदि दुकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रभारी ने दुकानदारों व्यवसायिक सिलिंडर का ही प्रयोग करने की हिदायत दी। साथ ही लकड़ी का प्रयोग करने वाले दुकानदारों एक दिन का स्टॉक रखने के निर्देश दिए। कहा कि अनावश्यक रूप से कोयला व लकड़ी दुकान के अंदर न रखें।
मेले में पहुंचा ढाई लाख का घोड़ा
तकिया मेले में दूर-दूर से बेहतरीन नस्लों के घोड़े आए हैं। मेले में ज्यादातर हाथरस, फतेहपुर, बांदा व राजस्थान के व्यापारी पहुंचे हैं। बांदा जनपद के पूर्व सैनिक शिव सागर सिंह को घोड़ा पालने का शौक है। उन्होंने बताया कि उनके पास 22 माह का सफेद रंग का राजस्थानी घोड़ा है। उन्होंने अपने घोड़े की कीमत ढाई लाख रुपए रखी है। हाथरस से आए यासिर ने बताया कि मेला शुरू होते ही खरीदारों का आना शुरू हुआ है। इस मेले में ऊंट व अन्य जानवरों की भी बिक्री होती रही है। हालांकि इस क्षेत्र में प्रचलन कम होने से कई साल से ऊंट व्यापारी नहीं आ रहे हैं।
फोटो-8- तकिया मेला में आयोजित लोकगीत कार्यक्रम में आल्हा गायन करते रायबरेली के गायक राजकुमार या- फोटो : reasi news