उन्नाव। दहेज के लिए गर्भवती पत्नी की जलाकर हत्या करने वाले पति को अपर जिला जज जयवीर सिंह नागर ने 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 15 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। दोष सिद्ध न होने पर सास को बरी कर दिया।
कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के विनायक नगर निवासी जितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने 26 सितंबर 2019 को आसीवन थाने में तहरीर दी थी। पुलिस को बताया कि उन्होंने छोटी बहन सुधा की शादी छह मार्च 2018 को आसीवन थाना के मिश्रापुर गांव निवासी सुशील मिश्रा से की थी। शादी के बाद से पति समेत अन्य ससुराल वाले कार देने की मांग करने लगे। मांग पूरी न होने पर सुधा का उत्पीड़न करने लगे।
जितेंद्र के अनुसार 26 सितंबर 2019 को दोपहर 12 बजे बहनोई सुशील मिश्रा ने फोन करके सूचना दी कि दूध गर्म करते समय सुधा की साड़ी में आग लगने से वह जल गई है। मौके पर पहुंचने पर घर में सुधा का जला शव मिला। उनकी तहरीर पर पुलिस ने पति के अलावा जेठ, जेठानी, नंद, नंदोई और सास के खिलाफ दहेज हत्या व अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। तत्कालीन तहसीलदार नरेंद्र कुमार यादव ने भी जांच की थी।
इसके बाद पुलिस ने पति व वृद्ध सास विजय लक्ष्मी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के पैर के तलवों के अलावा पूरा शरीर जला होने और गर्भवती होने की पुष्टि हुई थी। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या सात में शुरू हुई। शुक्रवार को अपर जिला जज जयवीर सिंह नागर ने सुशील मिश्रा को गर्भवती पत्नी सुधा की हत्या का दोष साबित होने पर दस साल की कैद और 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसी मुकदमे में नामजद 90 वर्षीय सास विजय लक्ष्मी के घटना के समय घर में मौजूद न होने की पुष्टि पर न्यायाधीश ने बरी कर दिया। दोषी को जेल भेज दिया गया।
जिस दिन हुई हत्या, छह साल बाद उसी तारीख को फैसला
शादी के करीब डेढ़ साल बाद सुधा की जलाकर हत्या कर दी गई थी। 26 सितंबर 2019 को हुई घटना का मुकदमा छह साल न्यायालय में विचाराधीन रहा। जिस दिन सुधा की हत्या हुई उसी तारीख को न्यायालय ने मुकदमे का फैसला सुनाया। मुकदमे की पेशी पर शुक्रवार को वृद्ध सास विजय लक्ष्मी भी न्यायालय में मौजूद रहीं।