फोटो-16-कार्यक्रम को संबोधित करतीं चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की वीसी रिसर्च प्रो. डॉ. सुसान एलियास। स
नवाबगंज। देश की पहली एआई ऑगमेंटेड चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को चार दिवसीय इंटरनेशनल समिट 1.0 ऑन इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन द ग्लोबल ट्रेंड का शुभारंभ हुआ। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों के समाधान में मध्यस्थता की बढ़ती भूमिका पर गहन मंथन करना है। डॉ. सुसान एलियास ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य हासिल करने को आर्बिट्रेशन सिस्टम जरूरी है।
लखनऊ के कुलपति डॉ. अमरपाल सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न केवल सशक्त विकल्प के रूप में उभरी है बल्कि यह कम समय और कम खर्च में निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने का सुलभ माध्यम भी साबित हो रही है। डॉ. सुसान एलियास ने कहा कि आज के वैश्विक कारोबारी माहौल में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता तेज, निष्पक्ष और प्रभावी विवाद समाधान का एक सशक्त माध्यम है। यह मंच छात्रों को वैश्विक कानूनी परिदृश्य से जोड़ता है और उन्हें व्यावहारिक ज्ञान व उद्योग का अनुभव प्रदान करता है।
देश के आर्थिक और औद्योगिक विकास की ओर तेजी से बढ़ने के दौर में आर्बिट्रेशन न्यायिक व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन रहा है। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मजबूत आर्बिट्रेशन सिस्टम जरूरी है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भागीदारी अभी सीमित है लेकिन सिंगापुर और हांगकांग जैसे देशों की तुलना में हमारे पास आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए छात्रों को अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर देना, जैसे छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम, महत्वपूर्ण है। यह समिट छात्रों को अंतरराष्ट्रीय कानून की बारीकियों को समझने और वैश्विक करियर की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाने में सहायक है। यह समिट छात्रों को अंतरराष्ट्रीय कानून की बारीकियों को समझने और वैश्विक कॅरिअर की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाने में सहायक है।