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Unnao News: अजीत है लुटेरों का सरगना, पंजाब में दर्ज हैं पांच मामले

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उन्नाव। सर्राफ और अलग-अलग स्थानों पर तीन युवकों से हुई लूट की वारदातों का पुलिस ने खुलासा कर दिया। लूट में शामिल चारों बदमाशों को अलीगढ़ और गाजियाबाद से पकड़ा गया था। लूट में एक नाबालिग भी शामिल है। इनका सरगना उन्नाव का 19 साल का युवक है। उस पर पंजाब के अलग-अलग थानों में चोरी के पांच मामले दर्ज हैं।
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बीघापुर कोतवाली क्षेत्र में 19 मई को कौशल से जमेल नहर पर छह नकाबपोश बदमाशों ने तमंचे के बल पर मोबाइल और बाइक लूटी थी। उसी दिन दाउदपुर गांव निवासी अविरल की बाइक अचलगंज के सैदपुर स्थित भट्ठे के पास लूटी गई थी। इसके अलावा दही थानाक्षेत्र के मोहित (28) के सिर पर पत्थर मारकर 1600 रुपये, मोबाइल, बाइक और हेलमेट लूट लिया था। 20 मई को जब आईजी किरण यश और एडीजी प्रवीण कुमार इन मामलों की यहां आकर जांच कर रहे थे तभी सदर कोतवाली के भवनीखेड़ा चौराहा स्थित सराफा की दुकान में घुसकर चार लुटेरे दुकानदार सुशील कुमार वर्मा (52) को घायल कर 4.10 लाख के जेवर और नकदी लूट ले गए थे।

वारदात को अंजाम देने के बाद लुटेरे ऊंचाहार एक्सप्रेस से पंजाब भाग रहे थे। चार लुटेरों को जीआरपी ने अलीगढ़ और गाजियाबाद स्टेशन से पकड़ा था। उनके पास से लूट के जेवर और रुपये भी मिले थे। गिरफ्तार लुटेरों में बीघापुर कोतवाली के रघुनाथखेड़ा निवासी अजीत कुमार उर्फ गोलू, पंजाब के मुस्तकाबाद अमृतसर निवासी दिलावर उर्फ गोला, अमृतसर के सीधा साहब भक्तों का एक नाबालिग और पंजाब के डेरावाला गुरदासपुर निवासी मनप्रीत शामिल हैं। पुलिस ने लुटेरों को लाकर पीड़ितों से पहचान कराई। शुक्रवार को तीन को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया। नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा गया है।
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सीओ मधुपनाथ मिश्र ने बताया कि चारों घटनाओं में यही लुटेरे शामिल थे, पीड़ितों के पहचान कराई गई है। बताया कि लुटेरों में शामिल अजीत कुमार उर्फ गोलू पर पंजाब के अलग-अलग थानों में पांच मामले दर्ज हैं। उसके पास से मिनी ग्लॉक पिस्टल बरामद हुई है।



बड़ा आदमी का सपना पूरा करने छह साल पहले गया था पंजाब

बीघापुर। लूट का मास्टर माइंड रघुनाथखेड़ा निवासी अजीत उर्फ गोलू का परिवार बहुत ही गरीब है। वह छह साल पहले पंजाब गया था। वहां सोने की दुकान में जेवर पॉलिश करने का काम करता था। उसी दुकान में वह चोरी कर भाग आया था। बाद में पकड़ा भी गया था।
कुछ दिन बाद जमानत पर जेल से बाहर आने पर उसने चार और वारदातों को अंजाम दिया। लूटे गए रुपयों से घर की दीवारें पक्की कराईं लेकिन स्लैब नहीं पड़ पाई थी। वह अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में लोगों की फोटो खींचने का काम करने लगा था। वहीं उसकी अन्य लुटेरों से भी मुलाकात हुई थी। घर में माता-पिता, दो छोटे भाई और तीन बहनें हैं। पिता खेती करते हैं। बहन ने बताया कि करीब चार साल से भाई घर नहीं आया था। उससे संपर्क भी नहीं होता था। वह बड़ा आदमी बनना चाहता था। उसी सपने ने उसे यहां तक पहुंचा दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि बट सावित्री पूजन पर गांव में देखा गया था। वह कोलुहागाढ़ा स्थित घाट पर गंगा स्नान करने भी गया था। इसके बाद नहीं देखा गया। (संवाद)
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