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Unnao News: ठंड की देरी से पक्षियों के आगमन पर संकट, ठहराव भी कम

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उन्नाव। डीएसएन कॉलेज के भूगोल के बीए और एमए के छात्रों ने नवाबगंज स्थित पक्षी विहार पहुंचकर अध्ययन किया। प्रवासी पक्षियों की गिनती की गई और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का विश्लेषण किया गया। छात्रों ने पाया कि पश्चिमी विक्षोभ की सर्दी देर से आने से पक्षियों का आगमन देर से हो रहा है और उनका ठहराव कम हो रहा है।
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वन क्षेत्राधिकारी विवेक सिंह और अभयारण्य के अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि पक्षी विहार 224.6 हेक्टेयर में फैला है। प्रतिवर्ष ग्रेलाग गूज, पिनटेल, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, गैडवाल, शॉवेलर, कूट और मलार्ड जैसे 250 से अधिक प्रजाति के पक्षी तिब्बत, चीन, यूरोप और साइबेरिया से हजारों किलोमीटर दूर से आते हैं। स्थानीय पक्षियों में सारस क्रेन, पेंटेड स्टॉर्क, पीफाउल, व्हाइट आईबिस, डैबचिक, व्हिसलिंग टीएल, ओपन-बिल स्टॉर्क, व्हाइट-नेक्ड स्टॉर्क, फीजेंट-टेल्ड जैकाना, ब्रॉन्ज-विंग्ड जैकाना, पर्पल मूरहेन, लैपविंग, टर्न, वल्चर, पिजन, किंग क्रो, इंडियन रोलर और बी-ईटर आदि पाए जाते हैं। छात्रों ने वॉच टावर, साइकिल ट्रैक और व्याख्यान कक्ष का उपयोग कर लुप्त हो रही प्रजातियों वूली-नेक्ड स्टॉर्क, लेसर एडजुटेंट और सारस क्रेन की गिनती की। छात्रों ने जलवायु परिवर्तन के प्रमुख प्रभावों का विश्लेषण भी किया।
फॉरेस्ट रेंजर ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ की देरी से सर्दी देर से शुरू हो रही है जिससे पक्षी नवंबर की बजाय जनवरी में आ रहे हैं। उनका ठहराव मात्र दो महीनों तक सीमित हो गया है। 1990 के दशक से प्रवास में बदलाव आ रहा है। पक्षी पारंपरिक मार्गों से विचलित होकर हिमाचल प्रदेश या राजस्थान की ओर रुख कर रहे हैं। छात्रों को बताया कि भारत में 66-73 फीसदी पक्षियों की प्रजातियां उत्तर की ओर स्थानांतरित हो रही हैं जबकि 58-59 प्रतिशत रेंज में बदलाव का सामना कर रही हैं। बढ़ते तापमान से पक्षियों का आकार छोटा हो रहा है और प्रजनन अवधि में परिवर्तन हो रहा है। तापमान एक से तीन डिग्री अधिक होने से पक्षी भ्रमित हो रहे हैं। इन बदलावों से पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। इस दौरान भूगोल विभाग के प्रमुख डॉ. अनिल साहू, डॉ. शैली गुप्ता भी मौजूद रहे।
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