उन्नाव। विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट कोर्ट नंबर 11 के न्यायाधीश विवेकानंद विश्वकर्मा ने अनुसूचित जाति की किशोरी से दुष्कर्म के दोषी अनीस चौरसिया को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा दी है। उस पर सात हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
असोहा थाना क्षेत्र की एक महिला ने 22 दिसंबर 2019 को पुलिस को तहरीर दी थी। उसने अनीस चौरसिया के खिलाफ नाबालिग बेटी से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया कि 22 दिसंबर को वह बाजार गई थी। नाबालिग बेटी खेत गई थी। वहां दऊ गांव निवासी अनीस चौरसिया ने बेटी को यूकेलिप्टस के बीच झाड़ी में खींच लिया। बेटी के चिल्लाने पर गांव के लोग पहुंच गए। पीड़िता के चाचा ने अन्य लोगों की मदद से आरोपी को पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज की थी।
पुलिस ने अनीस चौरसिया को जेल भेज दिया था। इसके बाद किशोरी का मेडिकल परीक्षण कराया गया। न्यायालय में उसके कलमबंद बयान दर्ज किए गए। अपने बयान में पीड़िता ने दुष्कर्म की बात कही थी। इसके बाद पुलिस ने अनीस के खिलाफ नाबालिग से दुष्कर्म की धारा बढ़ाई।
16 मार्च 2020 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट कोर्ट नंबर 11 में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई। न्यायाधीश विवेकानंद विश्वकर्मा ने अनीस चौरसिया को दोषी पाया। न्यायालय ने उसे 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई और सात हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। यह राशि पीड़िता अथवा उसके विधिक संरक्षक को नियमानुसार देने आदेश दिया गया।