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Unnao News: 28.70 करोड़ से बने आरआरसी, फिर भी साफ नहीं हुई गांवों की गंदगी

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फोटो-1-हसनगंज के बाराखेड़ा में भरा भूसा। संवाद
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उन्नाव। ग्राम पंचायतों को स्वच्छ बनाने की रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) योजना धरातल पर फेल हो गई है। संवाद न्यूज एजेंसी ने पड़ताल की तो पता चला कि तीन साल पहले शुरू हुई इस योजना में अब तक 1037 ग्राम पंचायतों में आरआरसी के निर्माण पर 28.70 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद अधिकांश केंद्रों का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। इससे गांवों से घर-घर कूड़ा उठाने की योजना सफल नहीं हो सकी है। कई जगहों पर आरआरसी केंद्र ध्वस्त होने लगे हैं। कुछ केंद्रों में भूसा भरा जा रहा है, तो कहीं अन्य सामान रखा जा रहा है।
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केस-1



कहीं उड़ी टिनशेड तो कहीं भरा है भूसा



हसनगंज। गांवों से निकलने वाले सूखे और गीले कूड़े को अलग कर निस्तारण के उद्देश्य से बनाए गए आरआरसी शोपीस और कबाड़ होने लगे हैं। अजमतगढ़ी व बाराखेड़ा में बने आरआरसी में भूसा भरा है। झलोतर गांव के आरआरसी सेंटर की टिनशेड उड़ चुकी है। किसी प्रकार का काम शुरू न होने से यह निष्प्रयोज्य होने लगे हैं।



केस-2



नवाबगंज के इटकुटी का आरआरसी क्षतिग्रस्त



नवाबगंज। विकासखंड के गांव इटकुटी में बना आरआरसी सेंटर संचालन न होने से क्षतिग्रस्त होने लगा है। यहां लगाई गई जाली टूट गई है। गेट गायब हो गया है। फर्श भी टूटने लगी है। परिसर में घास उगी है। ऐसे में यहां पर पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। बिछिया क्षेत्र के सोनिक में बने आरआरसी में सरसों रखी है। नवाबगंज के दुर्गाखेड़ा में सड़क बनाने वाले मजदूरों ने कब्जा जमा रखा है। यहीं पर खानपान का सामान रखे हुए हैं। इससे आरआरसी के निर्माण का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
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केस-3



केंद्रों का संचालन न होने से उगी घास



औरास। ब्लॉक में वित्तीय वर्ष 2022-23 में 61 ग्राम पंचायतों में 1.70 करोड़ से कूड़ा निस्तारण केंद्रों का निर्माण कराया गया था लेकिन इनका संचालन अबतक शुरू नहीं हो पाया है। कई कूड़ा निस्तारण केंद्रों में भूसा, पुआल व मौरंग गिट्टी भरी है। केंद्रों का संचालन न होने से यह क्षतिग्रस्त भी होने लगे हैं। मुसलावां में घास उग आई है। गेट क्षतिग्रस्त है। इससे केंद्र तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।








इन गांवों में भी निष्क्रिय हैं आरआरसी


-हसनगंज का कुरौली, जिंदासपुर, बरौना न्यामतपुर


-औरास का परौरी, मुसलावां, गोड़वा व मवई



-नवाबगंज का सधीरा


गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए यह थी अवधारणा



-स्वच्छ भारत मिशन से आरआरसी के साथ सोख व कंपोस्ट पिट निर्माण।



-रिक्शा गाड़ी से गांवों में डोर-टू-डोर सूखे और गीले कचरे का उठान, आरआरसी में छंटनी करना।



-कचरे को छांटकर प्लास्टिक, धातु जैसी रि-साइकिल योग्य सामग्री को अलग करना और जैविक कचरे से खाद बनाना।



-रि-साइकिल योग्य सामग्री और खाद की बिक्री करके पंचायतों की आय बढ़ाना और ग्रामीणों को रोजगार के अवसर देना।



वर्जन...



आरआरसी का सत्यापन कराया जा रहा है। जिन सेंटरों के निष्क्रिय होने की रिपोर्ट आ रही है, उनके सचिवों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया है। सभी की सत्यापन रिपोर्ट और नोटिस का जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। -आलोक कुमार सिन्हा, डीपीआरओ।

फोटो-1-हसनगंज के बाराखेड़ा में भरा भूसा। संवाद

फोटो-1-हसनगंज के बाराखेड़ा में भरा भूसा। संवाद

फोटो-1-हसनगंज के बाराखेड़ा में भरा भूसा। संवाद

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