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Unnao News: फर्जी बिल लगाकर भुगतान में प्रधान के अधिकार सीज, सचिव निलंबित

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उन्नाव। असावर गांव में पूर्व प्रधान द्वारा कराए गए पंचायत भवन की मरम्मत का वर्तमान प्रधान ने फर्जी बिल लगाकर दूसरी फर्म को 60 हजार रुपये भुगतान कर दिया। इतना ही नहीं मनरेगा मजदूरी का भुगतान दूसरे गांव के श्रमिकों के खाते में भेज दिया। जांच में पुष्टि होने पर डीएम ने प्रधान के अधिकार सीज कर दिए। साथ ही पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया।
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असावर के पूर्व प्रधान अशोक कुमार ने डीएम को शिकायती पत्र देकर फर्जी बिल लगाकर भुगतान की जानकारी दी थी। अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में पंचायत भवन की मरम्मत कराई थी। इसका भुगतान कराने से पहले ही पंचायत चुनाव की आचार संहिता लग गई थी। इससे भुगतान नहीं हो सका था।
नए प्रधान देवेश कुमार चौहान ने कार्यभार संभालने के बाद उनके समय के फर्जी बिल बनाए। दूसरी फर्म परिमल पाइप उद्योग का नाम लिखकर 60 हजार का भुगतान कर दिया जबकि उन्होंने फर्म एस ट्रेडर्स सहरावां से सामग्री लेकर काम कराया था। आरोप लगाया कि वर्तमान प्रधान से सेटिंग से दूसरे फर्म को भुगतान करा दिया और उसके बाद उससे पैसा ले लिया।
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इसी प्रकार करीब 15 से 20 हजार की मनरेगा मजदूरी दूसरे गांव के मजदूरों के खातों में भेजकर बाद में उनसे भी पैसा ले लिया। डीएम ने परियोजना निदेशक डीआरडीए से जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए गए। इस पर प्रधान से स्पष्टीकरण मांगा गया तो उन्होंने भुगतान की बात स्वीकारी। इसी आधार पर डीएम गौरांग राठी ने प्रधान के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सीज कर दिए। साथ ही अंतिम जांच के लिए जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को नामित किया है। परियोजना निदेशक की जांच में तत्कालीन सचिव प्रमोद कुमार सिंह को भी दोषी पाया गया। प्रमोद कुमार सिंह को डीपीआरओ आलोक सिन्हा ने निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में सचिव को गंजमुरादाबाद विकासखंड कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
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