नवाबगंज में मनरेगा के तहत गड्ढे खोदने में लगे श्रमिक। स्रोत:आर्काइव
उन्नाव। मनरेगा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए केंद्र सरकार ने श्रमिकों के चेहरे के सत्यापन की व्यवस्था शुरू की है। इसके लिए राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम साफ्टवेयर (एनएमएमएस) तैयार कराया है। इसके जरिए मनरेगा में काम करने वाले श्रमिकों का सत्यापन उनके चेहरे से होगा। अभी इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उन्नाव जिले में लागू किया गया है।
रोजगार के लिए ग्रामीणों का शहरी इलाकों को पलायन रोकने और गांवों का विकास करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले जाबकार्डधारक को एक वित्तीय वर्ष मेंं अधिकतम सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। जाबकार्डधारक के एक दिन के काम को एक मानवदिवस के रूप में जोड़ा जाता है।
अभी तक जो व्यवस्था है उसमें श्रमिकों की कार्यस्थल पर काम करते फोटो अपलोड की जाती है। इसमें फर्जीवाड़े की गुंजाइश बनी रहती है। प्रधान व सचिव द्वारा एक कार्य की कई बार फोटो अपलोड दिखाकर पैसा निकाला जाता है। अब इस पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने चेहरा सत्यापन की व्यवस्था शुरू की है। इस नई व्यवस्था के तहत, श्रमिकों की हाजिरी ऑनलाइन सत्यापित की जाएगी।
श्रमिक की आंखों की पुतली और चेहरा स्कैन किया जाएगा और उसके आधार नंबर से मिलान किया जाएगा। इसके जरिए एआई स्वतः ही श्रमिक की उपस्थिति दर्ज कर देगा। इसके बाद से गलत फोटो अपलोड करने की संभावना खत्म हो जाएगी।
इंसेट-1
जिले में अब तक 49 हजार श्रमिकों का सत्यापन
पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में जनपद में इस व्यवस्था को लागू किया गया है। जिले में इस समय 2.75 लाख जॉबकार्डधारक पंजीकृत हैं। इनमें से 2.25 लाख सक्रिय कार्डधारक (कार्य में आगे रहने वाले) हैं। इनमें से 49 हजार श्रमिकों का चेहरा सत्यापन किया जा चुका है और पूरी जानकारी अपलोड कर दी गई है।
वर्जन...
प्रदेश के बाराबंकी और हरदोई जिलों को पहले इसमें शामिल किया गया था। फिर हरदोई को हटाकर उन्नाव को शामिल किया गया। अब तक 49 हजार श्रमिकों का सत्यापन पूरा कर लिया गया है। शेष का काम तेजी के साथ पूरा कराया जा रहा है। -मुनेश चंद्र, मनरेगा उपायुक्त।