उन्नाव। पशु चिकित्सालयों के कायाकल्प को मिले 13.80 लाख रुपयों का जिम्मेदारों ने बंदरबांट कर लिया। डीएम की ओर से गठित की गई तीन सदस्यीय टीम ने स्थलीय जांच की तो काम अधूरा और भुगतान पूरा करने का खुलासा हुआ। मामले की जांच रिपोर्ट डीएम को भेजी है।
जिले के अलग-अलग 16 विकासखंडों में पशुपालन विभाग के 12 चिकित्सालय व दो पशु केंद्र हैं। लंबे समय से इन चिकित्सालयों व केंद्रों की न मरम्मत हुई थी और न ही रंगरोगन। शासन ने इसी साल मार्च में प्रति चिकित्सालय एक लाख रुपये जारी किए थे। पशु केंद्रों में प्रत्येक के लिए 90 हजार रुपये दिए थे। कुल 14 चिकित्सालय व केंद्रों की सामान्य मरम्मत व रंगाई पुताई के लिए 13.80 लाख रुपये जारी हुए थे। इसकी निगरानी व कार्य पूरा होने के बाद भुगतान पशुपालन विभाग को करना था। कुछ समय बाद विभाग ने कार्यदायी संस्था को कायाकल्प कार्यों के लिए पूरा भुगतान कर दिया। इसी बीच डीएम के पास शिकायत पहुंची कि संस्था ने काम पूरा नहीं किया, फिर भी उसे शत प्रतिशत भुगतान कर दिया गया।
डीएम ने तीन सदस्यीय टीम जांच के लिए गठित कर दी। टीम में जिला विकास अधिकारी, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के एक्सईएन और कोषाधिकारी को शामिल किया गया। इन अधिकारियों ने सिकंदरपुर कर्ण के अचलगंज के साथ सुमेरपुर के चार चिकित्सालय व केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण किया तो सभी में कायाकल्प कार्य अधूरे मिले। जांच टीम के सूत्रों का कहना है कि न तो खिड़कियों की मरम्मत मिली और न ही फर्श की। अधिकांश फर्श क्षतिग्रस्त व खिड़कियों के शीशे टूटे हैं। रंगरोगन में भी कामचलाऊ कार्य किया गया जबकि भुगतान पूरा कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम ने सरकारी धन की बर्बादी की पूरी रिपोर्ट तैयार करके डीएम को भेजने की तैयारी की है।
इंसेट-1
इन पशु चिकित्सालयों को सुदृढ़ीकरण के लिए मिले थे एक लाख
-औरास का शाहपुर तोंदा, सुमेरपुर का दौदापुर व सुमेरपुर, पुरवा का ममरेजपुर, मझिगवां सदकू, सिकंदरपुर कर्ण का अचलगंज, सिकंदरपुर सरोसी का रऊकरना, परियर, असोहा का नरसिंहपुर, औरास का देवतारा, हिलौली व नवाबगंज।
इन दो पशु केंद्रों के लिए मिले थे 90-90 हजार
सुमेरपुर का भगवंतनगर व बिछिया का कोरारीकला