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Unnao News: 22 गांवों के बाहर भरा बाढ़ का पानी, 50 हजार लोग परेशान

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छोट्टापुरवा में रास्ते में भरे पानी से कंधे पर बच्चे को बिठाकर निकलता युवक। संवाद - फोटो : 1
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गंजमुरादाबाद। बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के 22 गांवों में भरा बाढ़ का पानी 50 हजार की आबादी के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इससे जहां बाढ़ पीड़ितों और मवेशियों में बीमारियां फैलने की आशंका है, वहीं फसलें सड़ने और रास्ते बंद होने से लोग कामधंधा नहीं कर पा रहे हैं।
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पिछले वर्ष फरवरी में कल्याणी नदी की सफाई के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी गौरांग राठी ने ठोस कदम उठाते हुए सफाई अभियान का शिलान्यास किया था। सरकार से बजट न मिल पाने से कल्याणी नदी की सफाई नहीं हो सकी थी। यदि समय रहते सफाई हो जाती तो कल्याणी नदी में उफान नहीं आता। कल्याणी नदी में दूसरी बार उफान आने से बेहटाकच्छ, शिवलालपुरवा, लोनारी, कुशराजपुर, भिलोई, बाजीपुरवा, इच्छापुरवा, देवरिया, लहरापुर, छोट्टापुरवा, चोरहा, बिरैचामऊ, लहरापुर, चिंगरपुरवा, कछियनपुरवा, पकरियापुरवा, तकिया, ककरियापुरवा, बहलोलपुर, फतेहपुर हामजा व फतेहपुर खालसा आदि सहित कुल 22 गांव करीब एक महीने से पानी से घिरे हैं। पानी सड़कर दुर्गंध देने लगा है।

बीमारियों की चपेट में आने लगे ग्रामीण
लोनारी में 25 , छोट्टापुरवा में 19, बेहटाकच्छ में 13, देवरिया में 23, लहरापुर में 15, कछियनपुरवा में 11 लोग बीमारी से ग्रसित हो गए हैं। इसके अलावा इन गांवों में सूखे और सुरक्षित स्थानों पर मवेशी न बांधने से उनमें भी खुरपका मुहंपका और सर्रा जैसी बीमारियां पनपने लगी हैं। इसके साथ ही जंगली जानवर और जहरीले कीड़े भी दिखाई दे रहे हैं। मक्का की फसल तो पहले ही नष्ट हो चुकी है। धान की फसल दूसरी बार आई बाढ़ से पूरी तरह खराब हाेने की कगार पर है। गांवों में पानी भरे होने से लोग मजदूरी भी करने नहीं जा पा रहे हैं, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिषदीय स्कूलों में पानी भरे होने से पढ़ाई चौपटहै।
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इंसेट-2
रास्ते बंद होने से गांवों के बीच आवागमन ठप
देवरिया में बाढ़ के पानी में बच्चे के डूब जाने से लोगों में दहशत है। रास्ते बंद होने से लोग एक, दूसरे के गांवों तक नहीं जा रहे पा रहे हैं। कई परिवारों ने बाढ़ के कारण दूरदराज के रिश्तेदारों के यहां शरण ले रखी है। पानी भरे होने से लेखपाल भी फसलों का सर्वे नहीं कर पा रहे हैं। लगातार पानी बढ़ने से इन सभी 22 गांवों की स्थिति बद से बदतर हो गई है।
वर्जन...
बाढ़ का पानी सिमटने के बाद ही फसलों के नुकसान का सर्वे किया जा सकेगा। तभी नुकसान का सही आंकलन हो सकेगा। 35 फीसदी से अधिक नुकसान वाले हर किसान को उचित मुआवजा दिलाने के हर संभव प्रयास किए जाएंगे। -बृजमोहन शुक्ला, एसडीएम बांगरमऊ।

छोट्टापुरवा में रास्ते में भरे पानी से कंधे पर बच्चे को बिठाकर निकलता युवक। संवाद- फोटो : 1

छोट्टापुरवा में रास्ते में भरे पानी से कंधे पर बच्चे को बिठाकर निकलता युवक। संवाद- फोटो : 1

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