असोहा (उन्नाव)। एनएचएआई की सख्ती के बाद निर्माण एजेंसी ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की सीसीटीवी कैमरों से निगरानी शुरू कर दी है। 24 घंटे नजर रखी जा रही है। निर्माण एजेंसी पीएनसी का दावा है कि जहां भी कमी नजर आती है तुरंत तकनीकी टीम को भेजकर मरम्मत कराई जा रही है।
4200 करोड़ से बने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर यातायात शुरू होने के 12वें दिन से खामियां सामने आने लगी थीं। लगातार मरम्मत और पूरे 45 किलोमीटर लंबे ग्रीन फील्ड हिस्से में 2500 स्थानों पर पैचवर्क, नालियों की मरम्मत और वाहनों के आवागमन से बनी नालियों (व्हील ट्रैक) की मरम्मत कराई जा चुकी है। एनएचएआई की सख्ती पर निर्माण एजेंसी पीएनसी ने करीब 10 दिनों तक दिन-रात मरम्मत कराई है। दावा है कि फिलहाल कहीं कोई समस्या नहीं है। मैनेजर विजय एस कुंडू ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर दोनों लेन पर हर एक किलोमीटर पर (पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) कैमरे लगे हैं। सभी सक्रिय हैं और पूरे एक्सप्रेसवे की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। दावा है कि पिछले तीन दिन से एक्सप्रेसवे पर किसी तरह की कोई समस्या नहीं आई है।
बारिश बाद होगा एक्सप्रेसवे के ओवरले का काम
उन्नाव। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क की ओवरले कराने को लेकर एनएचएआई ने तैयारी की है। हालांकि इसके लिए बारिश रुकने और सड़क व किनारे पूरी तरह सूखने का इंतजार है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक लखनऊ नवरतन ने बताया कि एक्सप्रेसवे धंसने की जांच करने वाली आईआईटी खड़गपुर की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। हालांकि एक्सप्रेसवे को पूरी तरह सपाट बनाकर जर्किंग (उछाल) की समस्या को दूर करने के लिए ओवरले कराने की योजना है। अनुमान है कि सितंबर में बारिश रुक जाएगी। इसके बाद जैसे ही सड़क और किनारे के भरान की मिट्टी सूख जाएगी पूरे ग्रीन फील्ड एरिया की दोनों लेन पर ओवरले का काम कराया जाएगा।
ओवरले से सड़क होगी मजबूत और चिकनी
एनएचएआई के पूर्व जेई रवी प्रकाश ने बताया कि ओवरले से सड़क की सतह को मजबूत और चिकना बनाया जाता है। यह ऐसी मरम्मत प्रक्रिया है जिसमें सड़क की सतह पर डामर की एक नई परत बिछाई जाती है। ओवरले के लिए उपयोग किए जाने वाले डामर व अन्य सामग्री का प्रयोगशाला में परीक्षण करने के बाद ही प्रयोग किया जाता है। गिट्टी की मोटाई, बिटुमेन की मात्रा व अन्य बिंदुओं पर जांच के बाद नई परत बिछाते समय तापमान, मोटाई और फैलाव की एकरूपता का ध्यान रखा जाता है। इससे सड़क की जर्किंग खत्म होती है और वाहनों के टायर घिसाव कम होता है।