फोटो-38- बेहटा गांव के पास रविवार को धंसी सड़क की मरम्मत का का होता काम। संवाद
उन्नाव। एनएचएआई ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की जांच शुरू कर दी है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी आंध्र प्रदेश के इंजीनियर जांच कर रहे हैं। जांच के लिए बृहस्पतिवार को सड़क (डामर-गिट्टी) व मिट्टी के नमूने लिए हैं।एनएचएआई के इंजीनियर ने बताया कि एनआईटी इंजीनियर रवींद्र अपनी टीम के साथ यहां पहुंचे थे और सड़क को खोदकर नमूने लिए। बताया कि ग्रीन फील्ड वाले 45 किमी हिस्से (उन्नाव से बनी तक) दोनों लेन पर हर किलोमीटर में करीब 90 सैंपल लिए जाएंगे। बताया कि सड़क और मिट्टी की अलग-अलग जांच होगी। जांच रिपोर्ट आने में करीब एक पखवाड़ा का समय लग सकता है। जांच में सामने आएगा कि सड़क कितनी मोटी बनाई गई है और वह डेढ़ सौ टन भार क्षमता के अनुसार है या नहीं। साथ ही यह भी जांच होगी कि एनएचएआई की ओर से तय की गई डिजाइन के मानक के अनुसार है या नहीं।
एक्सप्रेसवे धंसने से एआईएमसी तकनीक के दावों पर उठ रहे सवाल
उन्नाव। एनएचएआई का दावा है कि यह एक्सप्रेसवे एआईएमसी तकनीक से बनाया गया है। इस तकनीक में सड़क में उपयोग होने वाली सामग्रियों में जैसे डामर कंक्रीट की गुणवत्ता की एआई मशीनों से जांच की जाती है। यह तकनीक सड़क में मिश्रण, बिछाने की प्रक्रिया, उसकी संरचना, तापमान, नमी व अन्य महत्वपूर्ण मापदंडों की निगरानी करके निर्माण पूरा किया जाता है। एनएचएआई के इंजीनियर राजीव कुमार ने बताया कि एआईएमसी तकनीक के माध्यम से सामग्री के मिश्रण में गलती नहीं होती। तकनीक में विभिन्न सेंसर, कैमरे और डेटा विश्लेषण उपकरण शामिल होते हैं। उपकरण निर्माण स्थल पर सामग्री के गुणों को मापते हैं। यदि डामर का मिश्रण बहुत गर्म या ठंडा है, तो एआई सिस्टम तापमान को समायोजित करने का संकेत देता है। 45 किलोमीटर ग्रीन फील्ड हिस्से में केवल 15 किमी हिस्से में बनी सड़क में कमी आई है। किस स्तर पर क्या गड़बड़ी हुई जांच में स्पष्ट हो जाएगा।