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Unnao News: उपकरण-स्टाफ पर अनदेखी, मदर-न्यू बॉर्न केयर यूनिट बनीं दिखावा

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उन्नाव। जिले के सभी 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में मदर एवं न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) बनाई गई हैं। सभी यूनिटों का 15 अप्रैल को एक साथ शुभारंभ तो किया गया लेकिन ये अब तक पूरी तरह से संचालित नहीं हो सकी है। सीएचसी में यूनिटों के लिए अलग से स्टाफ की व्यवस्था नहीं है। सीएचसी में तैनात चिकित्सा कर्मियों में से कुछ की ड्यूटी इनमें लगाई गई है। इसके अलावा कई जगह उपकरणों का अभाव है। कोरम पूरा करने के लिए ज्यादातर यूनिट को जच्चा-बच्चा वार्ड की तरह प्रयोग करके रजिस्टर पर संख्या बढ़ाई जा रही है।
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हसनगंज की यूनिट बनी गोदाम

हसनगंज। सीएचसी में बनाई गई सिक न्यू बॉर्न एंड मदर केयर यूनिट महज कागजी साबित हो रही है। सीएचसी में दो साल से बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. नितिन श्रीवास्तव ने बताया कि नवीनीकरण का काम चलने के कारण यूनिट को अस्थायी रूप से दूसरे कक्ष में स्थानांतरित किया गया है। इसी वजह से सामान बिखरा पड़ा है। जच्चा-बच्चा की देखभाल की जा रही है। बाल रोग विशेषज्ञ के लिए निदेशालय को फिर पत्र भेजा है। (संवाद)



सफीपुर यूनिट बनी जच्चा-बच्चा वार्ड



सफीपुर। सीएचसी में 15 अप्रैल को एमएनसीयू का संचालन शुरू हुआ था। हालांकि अलग से स्टाफ न होने से जच्चा-बच्चा वार्ड की तरह प्रयोग किया जा रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ फरीद अहमद ने बताया कि 15 अप्रैल से अब तक 16 जच्चा और 17 बच्चों को भर्ती किया गया। तीन बेड और चार वार्मर उपलब्ध हैं। तीन नर्स की ड्यूटी लगी है। (संवाद)
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पुरवा में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं, एक नर्स ही तैनात

पुरवा। सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि यूनिट में प्रशिक्षित स्टाफ नर्स निधू की तैनाती है। चार रेडियंट वार्मर, तीन बेड, दो फोटो थेरेपी मशीन व ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगे हैं। नियमानुसार तीन स्टाफ नर्स की तैनाती होनी चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञ न होने से यूनिट के संचालन में समस्या हो रही है। फिर भी आवश्यकता अनुसार प्रयोग किया जा रहा है। (संवाद)





यूनिट तैयार पर नहीं हो रहा संचालन



फतेहपुर चौरासी। अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि केंद्र पर मदर न्यूबार्न केयर यूनिट बनकर तैयार है। वार्ड में सभी आवश्यक उपकरण उपलब्ध है। बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। अभी यूनिट का संचालन नहीं हो सका है। स्टाफ की तैनाती की जा रही है। (संवाद)





वजन तौलने और फोटो थेरेपी की मशीन नहीं

बीघापुर। नगर पंचायत स्थित 100 बेड अस्पताल के सीएमएस डॉ. पीके दोहरे ने बताया कि एमएनसीयू वार्ड पूरी तरह से सक्रिय है। यहां बच्चों का वजन करने वाली मशीन और फोटो थेरेपी मशीन नहीं है। जल्द ही व्यवस्था कर ली जाएगी। यहां चार प्रशिक्षित स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट को तैनात किया गया है।





जिले में नवजात शिशु मृत्युदर प्रति 1000 में 34



समय पूर्व प्रसव व जन्म के समय कमजोर होने के कारण होने वाली नवजात शिशु मृत्युदर प्रति 1000 बच्चों में 34 है। यानी जन्मे एक हजार बच्चों में 34 की मृत्यु हो जाती है। यह नवजात समय से पहले जन्मे (प्री-मिच्योर) या अत्यधिक कमजोर होते हैं। इसी मृत्युदर में कमी लाने के उद्देश्य से इन यूनिटों की स्थापना की गई थी।

मदर केयर यूनिट कब जरूरी

नवजात का सामान्य वजन 2.5 किलोग्राम से कम है तो बच्चे को कंगारू मदर केयर की जरूरत होती है। प्रसूता, बच्चे को सीने से लगाकर रखती है। इससे बच्चे का वजन, ऑक्सीजन लेवल, तापमान आदि जल्दी से सामान्य होता है। यूनिट में नवजात और प्रसूता दोनों की देखभाल की व्यवस्था होती है।



वर्जन...



सभी सीएचसी और जिला महिला अस्पताल में सिक न्यू बॉर्न एंड मदर केयर यूनिट का संचालन शुरू हो गया है। जो भी कमियां हैं उन्हें भी जल्द ही दूर कर लिया जाएगा। यूनिट के लिए अलग से स्टाफ नहीं है। सीएचसी में उपलब्ध चिकित्सा कर्मियों में से ही कुछ की ड्यूटी लगाकर यूनिट का संचालन कराया जा रहा है। -डॉ. सत्यप्रकाश, सीएमओ
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