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Unnao News: मेगा ब्लॉक के दूसरे ही दिन रायबरेली पैसेंजर कर दी निरस्त

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फोटो-33-उन्नाव स्टेशन पर खड़ी कानपुर-बालामऊ पैसेंजर ट्रेन और चलने का इंतजार करते यात्री। संवाद
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उन्नाव। रेलवे के मेगा ब्लॉक से लखनऊ और कानपुर के बीच 17 ट्रेनें निरस्त रहने से उन्नाव से कानपुर आवागमन करने वाले करीब चार हजार लोगों के लिए लगातार दूसरा दिन मुश्किलों भरा रहा। उधर, रायबरेली से उन्नाव जंक्शन तक चलने वाले पैसेंजर ट्रेन शुक्रवार को नहीं आई। इससे पुरवा, बीघापुर तहसील क्षेत्र के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ये ट्रेन कल शनिवार को भी निरस्त रहेगी। लोगों को ई-बसों, टेंपो और ऑटो से सफर करना पड़ा।
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रेलवे गंगा पुल की मरम्मत के लिए एक तरफ मेगा ब्लॉक शुरू होने के दूसरे दिन भी मुसाफिरों की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 42 दिन के मेगा ब्लॉक के दौरान बालामऊ-कानपुर पैसेंजर और रायबरेली-कानपुर पैसेंजर ट्रेनों को उन्नाव जंक्शन तक चलाने की घोषणा की गई थी। लेकिन ब्लॉक के दूसरे ही दिन रायबरेली पैसेंजर ट्रेन को निरस्त कर दिया गया। एएसएम राहुल रॉय ने बताया कि रायबरेली-कानपुर पैसेंजर ट्रेन कल शनिवार को भी निरस्त रहेगी। ट्रेनें न चलने से यात्रियों को कानपुर जाने आने के लिए सड़क यातायात का सहारा लेना पड़ा। टेंपो और ऑटो चालकों ने लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए दोगुनी से ज्यादा सवारियां बैठाईं। जिन यात्रियों ने विरोध किया, चालकों ने उनसे दो यात्रियों का किराया लेकर बैठाया।
रायबरेली पैसेंजर निरस्त होने से बढ़ी परेशानी
रायबरेली पैसेंजर ट्रेन शुक्रवार को निरस्त रहने से बीघापुर, कोरारी, कांटी, अचलगंज, ललऊखेड़ा, डीह आदि क्षेत्रों से सफर करने वाले यात्रियों को यात्री वाहनों से सफर करना पड़ा। लोग सुबह गदनखेड़ा बाईपास पहुंचे लेकिन यात्री अधिक होने से यहां भी वाहनों की मारामारी रही। लोगों को काफी देर इंतजार करना पड़ा वहीं कुछ ने माल वाहक वाहनों से सफर किया।
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फोटो नंबर-36-सेवानिवृत्त सीनियर सेक्शन इंजीनियर सैयद हसन अस्करी जैदी। स्रोत: स्वयं
मेगा ब्लॉक पर सेवानिवृत्त सीनियर सेक्शन इंजीनियर ने उठाए सवाल



कहा-1996 में चार घंटे ही ब्लॉक लेकर बदलवाए थे अप लाइन के स्लीपर
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग पर चल रहे मेगा ब्लॉक की योजना पर रेलवे के सेवानिवृत्त सीनियर सेक्शन इंजीनियर ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने बड़ी संख्या में ट्रेनें रोकने और रूट बदलने को गलत बताया है।
सेवानिवृत्त सीनियर सेक्शन इंजीनियर सैयद हसन अस्करी जैदी ने बताया कि वर्ष 1996 में इसी रेलवे ट्रैक पर उन्होंने चार घंटे का ब्लॉक लिया था। तब एक महीने में ही सभी स्लीपर बदलवा दिए थे। लंबी दूरी की प्रमुख एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को निकालने के बाद ही काम शुरू होता था। साप्ताहिक ट्रेनों के निर्धारित दिनों में ब्लॉक नहीं लिया जाता था।
जैदी ने कहा कि लगातार दूसरे साल मेगा ब्लॉक के लिए ठीक से योजना नहीं बनाई गई है। इसी वजह से यात्रियों को परेशानी हो रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान में भी ऐसी ही योजना अपनाई जानी चाहिए जिससे काम भी हो और यात्रियों को कम से कम असुविधा हो। सुबह रायबरेली वाया उन्नाव होते हुए 9:40 बजे कानपुर पहुंचने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस और मेमू को निकालने के बाद काम शुरू किया जाता था।

फोटो-33-उन्नाव स्टेशन पर खड़ी कानपुर-बालामऊ पैसेंजर ट्रेन और चलने का इंतजार करते यात्री। संवाद

फोटो-33-उन्नाव स्टेशन पर खड़ी कानपुर-बालामऊ पैसेंजर ट्रेन और चलने का इंतजार करते यात्री। संवाद

फोटो-33-उन्नाव स्टेशन पर खड़ी कानपुर-बालामऊ पैसेंजर ट्रेन और चलने का इंतजार करते यात्री। संवाद

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