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Unnao News: पशु चिकित्सालयों के कायाकल्प में घालमेल में डिप्टी सीवीओ भी हटाए गए

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उन्नाव। पशु चिकित्सालयों के कायाकल्प के लिए मिले बजट में हुए घपले में जिलास्तरीय जांच में दोषी डिप्टी सीवीओ डॉ. संजय चतुर्वेदी को शासन ने लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। इस मामले में 18 जनवरी को विधान परिषद में भी कार्रवाई न होने का मुद्दा उठा था। जांच रिपोर्ट में नाम होने से एक अन्य पशु चिकित्साधिकारी पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
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जिले के 16 ब्लॉकों में स्थित पशु चिकित्सालयों की मरम्मत और रंग-रोगन के लिए मार्च 2025 में 13.80 लाख रुपये का बजट आवंटित हुआ था। जांच में सामने आया कि काम पूरा होने से पहले ही कार्यदायी संस्था को पूरा भुगतान कर दिया गया। शहर स्थित पशु चिकित्सालय में बिना कोई काम कराए 90 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया था।
सिकंदरपुर कर्ण, अचलगंज और सुमेरपुर सहित अन्य चिकित्सालयों में भी काम अधूरे पाए गए। टाइल्स लगवाए बिना ही भुगतान कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, 30 रुपये की झाड़ू 300 रुपये में और 100 रुपये का डस्टर 1000 रुपये में खरीदा गया था। जिलाधिकारी गौरांग राठी के निर्देश पर एक तीन सदस्यीय जांच समिति ने मामले की जांच की थी। इस समिति में जिला विकास अधिकारी, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता और कोषाधिकारी शामिल थे।
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जिलाधिकारी ने तत्कालीन सीवीओ डॉ. महावीर सिंह, डिप्टी सीवीओ संजय चतुर्वेदी और पशु चिकित्साधिकारी शरद शाक्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी थी। तत्कालीन सीवीओ पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी थी। डिप्टी सीवीओ पर कार्रवाई न होने पर एमएलसी डॉ. मान सिंह ने 18 जनवरी को विधान परिषद में सवाल उठाए थे। उन्होंने जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के दोषी होने के बावजूद कार्रवाई न होने पर प्रश्नचिह्न लगाया था। बुधवार, 17 मार्च 2026 को पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. मेमपाल सिंह ने डॉ. संजय चतुर्वेदी को लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया।


अन्य दोषियों पर भी कसा शिकंजा

इस मामले में सीवीओ कार्यालय की वरिष्ठ सहायक प्रभारी अकाउंटेंट प्रीति श्रीवास्तव को भी नवंबर 2025 में निलंबित किया गया था। जांच रिपोर्ट में पशु चिकित्साधिकारी शरद शाक्य का नाम भी शामिल है। उनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई होने की चर्चा है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा शासन को भेजे गए पत्र के आधार पर ही उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को लखनऊ निदेशालय संबद्ध किया गया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है।



जांच में मिली थीं कई अनियमितताएं
जांच में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। बिना काम कराए ही लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। कई चिकित्सालयों में मरम्मत और रंग-रोगन का काम अधूरा पाया गया। टाइल्स न लगने के बावजूद उनका भुगतान कर दिया गया था। सामग्री खरीद में भी भारी गड़बड़ी मिली, जहां बाजार मूल्य से दस गुना अधिक दाम वसूले गए।
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