उन्नाव। जिला पंचायत में विकास कार्यों के टेंडरों में शासनादेश की अनदेखी और करोड़ों रुपये के घपले की शिकायतों पर पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव ने जांच बैठा दी है। उच्चस्तरीय जांच से महकमे में खलबली मच गई है। तीन सदस्यीय जांच समिति में आजमगढ़ जिला पंचायत के अधिशासी अभियंता को अध्यक्ष बनाया गया है।
जिला पंचायत ने अलग-अलग ब्लाॅकों में 2.89 करोड़ रुपये की लागत से पांच अमृत सरोवर बनवाए थे। गुणवत्ता खराब होने से ये दो साल भी ठीक नहीं रह पाए। हालांकि जिला पंचायत के जिम्मेदारों का कहना है कि निर्माण के बाद इनका हस्तांतरण ग्राम पंचायतों को कर दिया गया था और रखरखाव उनकी जिम्मेदारी थी। वहीं, ग्राम पंचायतों में 2.3 करोड़ रुपये खर्च कर लगाई गईं 125 हाईमास्ट लाइटों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ये लाइटें दोयम दर्जे की हैं और भुगतान में लगाए गए प्रपत्रों की जांच से हकीकत सामने आ जाएगी।
पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव जय प्रकाश पांडेय ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इसमें आजमगढ़ जिला पंचायत के अधिशासी अभियंता अभय सिंह अध्यक्ष, गोंडा जिला पंचायत के अभियंता शशि यादव और पीडब्ल्यूडी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर सदस्य शामिल हैं। विशेष सचिव ने इस समिति को 12 फरवरी 2026 को गठित किया था और 15 दिन के भीतर स्थलीय जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
अमृत सरोवर बनाने के बाद ग्राम पंचायतों को हैंडओवर कर दिए गए थे। रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। हाईमास्ट लाइटों में किसी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई है। समय के साथ हो सकता है कुछ लाइटें खराब हुई हों। जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।-शकुन सिंह, अध्यक्ष जिला पंचायत।
कुछ दिन पहले ही उन्नाव जिला पंचायत का कार्यभार संभाला है, रायबरेली का भी चार्ज देखना रहता है। इस कारण उन्नाव जिला पंचायत के इन विकास कार्यों की जानकारी नहीं है, शासन में हुई शिकायत पर पंचायतीराज विभाग के विशेष सचिव ने जांच टीम बनाई है। जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। -ओपी सिंह, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत।