उन्नाव। विदेशों से आयात होने वाले सामानों पर इम्पोर्ट ऑफ गुड्स पैट कंसेसनल रेट (आईजीसीआर) के विस्तार से चमड़ा और कपड़ा उद्योग को रफ्तार मिलेगी। विदेशों से आयात होने वाले शू अपर के उपयोगी कंपोनेंट, चमड़ा की टेनिंग में प्रयोग होने केमिकल, रंग व पॉलिश आदि पर टैक्स कम होने से लागत घटेगी। अब यहां बनने वाला चमड़ा पाकिस्तान, बांग्लादेश के मुकाबले 10 से 15 फीसदी सस्ता होगा। इससे मांग और व्यापार बढ़ेगा।
अमेरिका के टैरिफ से छह महीने से लड़खड़ाए चमड़ा उद्योग को उबारने के लिए केंद्र सरकार ने बजट में आईजीसीआर योजना के विस्तार की घोषणा की थी। इससे शू अपर में उपयोग होने वाले कंपोनेंट व कच्चे माल के आयात में शुल्क अधिकांश में शून्य से 10 फीसदी ही लगेगा। इससे शू अपर में उपयोग होने वाले आइलेट, सिंथेटिक जिपर, बक्कल, लेजर, सिंथेटिक फैब्रिक, धागा, ब्लेड, उपकरण के अलावा चमड़े की टेनिगं (कच्ची खाल को चमड़ा बनाने की प्रक्रिया) में उपयोग होने वाले महंगे केमिकल, रंग और पॉलिश में प्रयोग होने कंपोनेंट आदि पर आयात शुल्क नहीं या 10 फीसदी ही होगा।
इससे चीन, वियतनाम, इटली, यूके आदि देशों से आयात सस्ता होगा। इससे चमड़ा, जूता, जैकेट, सेडलरी (घोड़े की काठी) व अन्य चर्म उत्पादों की लागत घटेगी और भारत के उत्पाद पाकिस्तान, बांगलादेश, नेपाल आदि देशों के मुकाबले सस्ते होंगे। वहीं दूसरी तरफ, ईयू (यूरोपीय संघ) से हुए व्यापार समझौते से आने वाले समय में 27 देशों में भारतीय उत्पादों का निर्यात आसान और सस्ता होगा। इससे चमड़ा उत्पादों का निर्यात व्यापार दो से ढाई गुना और बढ़ने की उम्मीद है।
10 से 15 फीसदी घट जाएगी लागत
आईजीसीआर योजना के विस्तार से कई महीनों से चरमराए चमड़ा उद्योग को बड़ा सहारा मिला है। योजना को सरकार ने 31 मार्च 2028 तक बढ़ाया है। इससे शू अपर और चमड़ा तैयार करने में उपयोग होने वाली केमिकल, पॉलिश व अन्य सामग्री और मशीनों के आयात पर सीमा शुल्क में छूट मिलेगी। इससे चर्म उत्पादों की लागत भी 10 से 15 फीसदी कम होगी। -ताज आलम, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश चमड़ा उद्योग संघ उन्नाव चैप्टर