फोटो-27-लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर हादसे के बाद इमरजेंसी कट को बंद करते कर्मचारी। संवाद
उन्नाव। लखनऊ-कानपुर हाईवे पर जगह-जगह खतरे हैं। कोहरे के दौरान ये जानलेवा साबित होते हैं। बुधवार की रात लखनऊ-कानपुर हाईवे पर भल्ला फार्म तिराहे पर दंपती और दो बच्चों की मौत की घटना में भी सुरक्षा की अनदेखी वजह बनी।
तिराहे पर पिकेट ड्यूटी भी लगती है और 200 मीटर दूर पुलिस चौकी भी है लेकिन हादसे रोकने के इंतजाम नहीं हैं। यही हाल अन्य हाईवे और एक्सप्रेसवे का है। कहीं अवैध पार्किंग हादसों की वजह बन रही है तो कहीं सड़क सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि हाईवे पर सुधार के काम कराए जा रहे हैं। मार्च तक पूरी तरह दुरुस्त हो जाएगा।
लखनऊ-कानपुर हाईवे की जिले में लंबाई 82 किलोमीटर है। यहां कई स्थानों पर अवैध कट और 73 स्थानों पर अवैध पार्किंग हादसों की वजह बनती है। इनमें पेट्रोल पंप, होटल, ढाबे व अन्य स्थान शामिल हैं। बुधवार रात की भल्ला फार्म तिराहे पर हुए हादसे में दंपती और उनके दो बच्चों की मौत हुई उसमें भी जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आई। कांथा-असोहा मार्ग की ओर से आए कंटेनर चालक ने जल्दबाजी में हाईवे पार करने की कोशिश की। ट्रक ने उसके पिछले हिस्से में टक्कर मारते हुए सड़क किनारे बाइक सवारों को कुचल दिया।
यह तिराहा लखनऊ-रायबरेली हाईवे को लखनऊ-कानपुर हाईवे से जोड़ता है। यहां चालकों को सतर्क करने के लिए पीली-लाल ब्लिंकर लाइटें नहीं लगी हैं। कुछ ऐसा ही हाल पूरे हाईवे का है।