सफीपुर। पांच दिन पहले सीएचसी परिसर में दस बोरी उपयोगी दवाएं जलाने की घटना में खराब कैमरा और अधजली दवाएं हटाकर कर साक्ष्य मिटाने के प्रयासों ने जांच को उलझा दिया है। जांच अधिकारियों ने बताया कि चीफ फार्मासिस्ट, स्वास्थ्य शिक्षा सूचना अधिकारी और प्रसव कक्ष में तैनात स्टाफ नर्स को बयान अभी बाकी हैं।
मालूम हो कि बीते शनिवार को सफीपुर सीएचसी परिसर में करीब दस बोरी दवाएं जला दी गई थीं। इनमें 2025 के अलावा 2026-27 में एक्सपायर होने वाली दवाएं भी शामिल थीं। डीएम गौरांग राठी ने एडीएम (नमामिगंगे) विधेश कुमार की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। मंगलवार को एडीएम नमामि गंगे के साथ पहुंचे एसीएमओ डा. एचएन प्रसाद ने दवा जलाने की घटना में स्थलीय जांच कर सीएमओ कार्यालय से संबद्ध किए गए तत्कालीन सीएचसी अधीक्षक डाॅ. राजेश कुमार से लेकर कई कर्मचारियों और सफाई कर्मियों के भी बयान लिए थे।
एसीएमओ ने बताया कि इस प्रकरण में सीएचसी से हटाए गए चीफ फार्मासिस्ट प्रेमशंकर, स्वास्थ्य शिक्षा सूचना अधिकारी और प्रसव कक्ष में तैनात स्टाफ नर्स को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है। इनके बयान के बाद ही आरोप तय किए जाएंगे।
हटाए गए सीएचसी अधीक्षक की पहुंच की चर्चा
सफीपुर। सीएचसी में दवाएं जलाए जाने की घटना के बाद अधीक्षक रहे डॉ. राजेश कुमार वर्मा की पहुंच की चर्चा रही। जिले में करीब 15 साल पूरे कर चुके डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने बिछिया, हसनगंज, मियागंज ,सफीपुर में सेवाएं दीं। चर्चा है कि अपने प्रभाव के चलते डॉ, ललित कुमार के सीनियर होने के बावजूद सफीपुर में अधीक्षक बने इसके बाद डॉ. ललित कुमार सीएचसी अधीक्षक बनने के लिए न्यायालय का सहारा लेना पड़ा था। एसीएमओ पद पर पदोन्नति के बाद दूसरे जिला तबादला हुआ लेकिन वह सफीपुर में ही बने रहे दंत चिकित्सक डॉ. फौजिया की शिकायत पर प्रदेश स्तरीय जांच में भी उन्हें क्लीन चिट मिली। पिछले दिनों मियागज सीएचसी अधीक्षक का हसनगंज तबादला हुआ तो डॉ. राजेश कुमार वर्मा को सफीपुर के साथ मियागंज सीएचसी का भी चार्ज मिल गया। एसीएमओ बनने के बाद भी सीएचसी अधीक्षक पद का उनका मोह, लोगों में चर्चा का विषय बना है।