फतेहपुर चौरासी। चार माह पहले 27 करोड़ की लागत से बनाया गया कालीमिट्टी-शिवराजपुर मार्ग गंगा की बाढ़ से कट गया। कई जगह आधे से अधिक मार्ग जाने से चलने लायक नहीं बचा। अभी भी मार्ग का कटान हो रहा है। पीडब्यूडी तमाम प्रयासों के बाद भी नहीं बचा पा रहा है। अब पीडब्ल्यूडी ने मार्ग बचाने के लिए आईआईटी रुड़की को पत्र भेजकर मदद मांगी है।
उन्नाव-हरदोई रोड को कालीमिट्टी से फतेहपुर चौरासी होते हुए कानपुर के शिवराजपुर से जोड़ने वाले 14.6 किमी लंबे इस मार्ग का चौड़ीकरण 16 जून को हुआ था। इसके बाद आवागमन के लिए खोला गया था। गंगा में आई बाढ़ से मार्ग का काफी हिस्सा पानी में बह गया था। इसके बाद वाहनों का आवागमन रोक दिया गया था। पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड ने ईंट भरी बोरियां लगाकर कटान रोकने की कोशिश की लेकिन ये उपाय कारगर नहीं हुए। दो दिन पूर्व वैकल्पिक मार्ग की कवायद शुरू हुई थी लेकिन फिर से कटान होने से काम रोक दिया गया है। मार्ग को कटने से बचाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने आईआईटी रुड़की की मदद लेने के लिए पत्र भेजा है। आईआईटी के इंजीनियरों के जरिए कटान के कारण, उसे रोकने और भविष्य के लिए रोड सुरक्षित रखने के उपाय तलाशे जाएंगे। (संवाद)
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मार्ग ध्वस्त होने की कगार पर, आवागमन बंद
कटान ज्यादा होने से अब मार्ग पूरी तरह से ध्वस्त होने की कगार पर पहुंच गया है। यह मार्ग कानपुर व उन्नाव को जोड़ता है। वर्तमान में आवागमन बंद है और खैरागाड़ा, रुस्तमपुर, मन्नानगर, चिरंजूपुरवा, जयराजमऊ, पसनियाखेड़ा, सीतारामखेड़ा, परशुरामपुर, गड़ाई, दबौली बाजार, हिंदूपुर, खलकखेड़ा, सुब्बापुरवा, नयाबंगला, शहरिया सलेमपुर, कुशेहर बंगला आदि गांवों के लोग करीब 50 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगा रहे हैं।
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विभागीय स्तर पर कटान रोकने के प्रयास किए गए लेकिन कारगर साबित नहीं हुए। अब आईआईटी रुड़की की मदद लेने की तैयारी की गई है। इसके लिए पत्र आईआईटी को भेज दिया है। दिवाली के बाद आईआईटी की टीम मौके पर पहुंचकर जांच कर सकती है। -सुबोध कुमार, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी निर्माणखंड।