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पाताल भाग रहा पानी

Sun, 03 May 2015 10:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव। हर साल नीचे जाता भूगर्भ जल आने वाले दिनों में भयावह स्थिति के संकेत दे रहा है। सामान्य गहराई वाले हैंडपंप अभी से पानी छोड़ने लगे हैं। पहले स्टेटा पर लगे ट्यूबवेल भी पर्याप्त पानी नहीं दे रहे। दूसरे स्टेटा पर लगे इंडिया मार्का हैंडपंप क्षमता के मुताबिक पानी नहीं दे रहे। गर्मी की शुरुआत का हाल आने वाले दिनों की भयावह स्थिति के संकेत दे रहा है।
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जिले में भू-गर्भ जलस्तर हर साल और नीचे खिसक रहा है। आलम यह है कि पहले स्टेटा पर लगे हैंडपंप और ट्यूबवेल पानी छोड़ चुके हैं। जबकि दूसरे स्टेटा पर लगे हैंडपंप और ट्यूबवेल से भी पानी की धार पतली होती जा रही है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक के लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। घरेलू हैंडपंपों के पानी छोड़ देने से लोगों को पेयजल की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सार्वजनिक स्थानों पर लगे सरकारी इंडिया मार्का हैंडपंप भी कम पानी दे रहे हैं।

जिला अस्पताल परिसर में लगा हैंडपंप कई दिनों से पानी नहीं दे रहा है। इसके चलते अस्पताल आने वाले मरीज और उनके तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पानी की किल्लत से परेशान लोग यहां लगे आरओ के पानी से कपड़े धोते और नहाते नजर आते हैं। सीएमएस एसपी चौधरी ने बताया कि हैंडपंप की मरम्मत या रिबोर कराना जो भी आवश्यक होगा कराया जाएगा।
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कांशीराम कालोनी में लगे हैंडपंप जवाब देने लगे हैं। छह में चार हैंडपंप ने पानी देना बंद कर दिया है। कालोनी में रहने वाले परिवारों में करीब एक हजार परिवार पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। हालत यह है कि तीसरी-चौथी मंजिल पर रहने वाले लोगों के हाथों में छाले पड़ गए हैं। नगर पालिका के जलकल अभियंता पीके जौहरी ने बताया कि पानी नहीं दे रहे हैंडपंपों की मरम्मत और रिबोरिंग कराई जा रही है।

रेलवे स्टेशन परिसर में टिकट काउंटर के पास लगा हैंडपंप गर्मी की शुरुआत होते ही जवाब दे गया। हैंडपंप खराब होने से स्टेशन आने वाले हजारों यात्रियों को खासी दिक्कतों सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन आने-जाने और ट्रेन के इंतजार में बैठे यात्रियों को काफी दिक्कत हो रही है। स्टेशन अधीक्षक विश्राम ने बताया कि हैंडपंप ठीक कराने की कार्रवाई चल रही है। जल्द ही इसे ठीक करा दिया जाएगा।

फाइलों में कैद हो गए पूर्व डीएम के निर्देश
उन्नाव। अगर जिला प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम उठाए होते और वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए वाटर रिचार्जिंग के प्रयास किए जाते तो शायद भूगर्भ जलस्तर को इतनी तेजी नीचे जाने से बचाया जा सकता था। हालांकि पूर्व जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने यूडीए को निर्देश दिए थे कि वह 300 वर्ग मीटर क्षेत्रफल से अधिक सभी प्रकार के भवनों में रूफ टाप रेनवाटर हार्वेस्टिंग के लिए भूगर्भ जल विभाग द्वारा अनुमोदित डिजाइन के अनुसार वाटर रिचार्जिंग पिट का निर्माण कराया जाए। उन्होंने नक्शा पास करते समय भवन स्वामियों को इसके निर्देश देने और अनुपालन न करने पर भवन स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। शुरुआती चरण में कुछ काम हुआ मगर उनके जाते ही योजना फाइलों में कैद हो गई।
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