उन्नाव: तत्कालीन माखी एसओ अशोक भदौरिया।
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उन्नाव। भाजपा के पूर्व विधायक का खास बननेवाले दोनों पुलिस कर्मियों ने बेरहमी से पीटे गए दुष्कर्म पीड़िता के घायल पिता को फर्जी तरीके से आर्म्स एक्ट की धाराओं में जेल भेज दिया था। मंगलवार को तीस हजारी कोर्ट के फैसले में दोनाें पुलिस कर्मियों के दोषी करार दिए जाने के बाद पूरे दिन पुलिस विभाग में भी इसी प्रकरण की चर्चाएं होती रहीं। पुलिस कर्मी एक दूसरे से इस प्रकरण से सबक लेने की बात कहते रहे।
3 अप्रैल 2018 की रात दुष्कर्म पीड़िता का पिता दिल्ली से अपने गांव लौटा था। यहां पूर्व विधायक के भाई अतुल सेंगर ने अपने सहयोगियों के साथ उसे बेहरमी से पीटा। पिता को बचाने के लिए दुष्कर्म पीड़िता व उसका परिवार अतुल के सामने गिड़गिड़ाता रहा। किसी के न सुनने पर खुद को जनता की मददगार बताने वाली पुलिस को सूचना देकर मदद मांगी। पुलिस पहुंची तो मदद की जगह उल्टे उसके पिता को ही दोषी बता आर्म्स एक्ट की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेज दिया। इस पूरे प्रकरण में पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के खास माने जाने वाले उस समय माखी थाना प्रभारी रहे उपनिरीक्षक अशोक सिंह भदौरिया व दरोगा कामता प्रसाद उर्फ केपी सिंह ने कानून को हाथ में लेकर पीड़ित परिवार पर जुल्म ढाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पूर्व विधायक पर शिकंजा कसने के बाद इस दोनों पुलिस कर्मियों पर भी रिपोर्ट दर्ज कर सीबीआई ने जेल भेजा था। दोनों इस वक्त दिल्ली की तिहाड़ जेल में हैं। मंगलवार को तीस हजारी कोर्ट के आए फैसले में दोनों को दोषी करार दिए जाने के बाद पुलिस को बड़ा सबक मिला है।
उन्नाव के माखी के तत्कालीन हल्का इंचार्ज केपी सिंह।- फोटो : UNNAO