उन्नाव। जिला कारागार में मोबाइल होने की सूचना पर छापा मारने गए डिप्टी जेलर व उनकी टीम के साथ हाथापाई करने वाले तीन बंदियों को अपर जिला जज तृतीय की न्यायालय ने दोषी करार दिया है। न्यायालय में उपस्थित न होने के चलते मंगलवार को सजा नहीं सुनाई गई।
डिप्टी जेलर आलोक कुमार शुक्ला ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि 29 जनवरी 2014 को उन्हें जेल में निरुद्ध बंदियों के पास मोबाइल होने की सूचना मिली थी। इस पर वह प्रभारी अधीक्षक प्रभा शंकर मिश्रा, डिप्टी जेलर आदित्य कुमार, प्रधान बंदी रक्षक रवींद्र सिंह के साथ बैरकों की तलाशी ले रहे थे। बैरक नंबर 12 की तलाशी लेने के दौरान बंदी कृष्णानंद राय अंदर बने शौचालय में जाने लगा। जैसे ही कारागार अधीक्षक वहां पहुंचे तो कृष्णानंद ने हाथ में पकड़े मोबाइल से सिम निकाला और उसे शौचालय सीट में डालकर पानी डाल दिया। हाथ में मोबाइल देखकर जब बंदी से पूछताछ की गई तो उसने डिप्टी जेलर का कालर पकड़ उसे धक्का देकर गिरा दिया। आरोपी ने उनका गला घोंटने की भी कोशिश की। शोर सुनकर जेलर व बंदी रक्षक पहुंचे तो बंदी ने साथियों के साथ मिलकर पथराव कर दिया। इसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
डिप्टी जेलर ने बंदियों में बांगरमऊ कोतवाली के तालाबगंज मोहल्ला निवासी वासिद, सीतापुर जिले के संदरा थाना के रसूलपुर निवासी राजकुमार और आसीवन थानाक्षेत्र के मियागंज गांव निवासी बंदी खालिद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचक एसआई जितेंद्र सिंह यादव ने 12 जनवरी 2018 को तीनों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। मंगलवार को अपर सत्र न्यायालय तृतीय में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई। न्यायाधीश कविता मिश्रा ने तीनों को दोषी पाया। हालांकि तीनों दोषियों के न्यायालय में उपस्थित न होने से मंगलवार को सजा नहीं सुनाई गई। न्यायालय में पेश न होने पर तीनों के गैर जमानती वारंट जारी किया है।