उन्नाव। इस बार आम का ऑन ईयर होने से अच्छा उत्पादन होने की संभावना बढ़ गई है। पेड़ोें में बौर आने की शुरुआत हो चुकी है। इससे उत्पादकों के चेहरे खिले नजर आ रहे हैं। उद्यान विभाग और आम उत्पादक इस सीजन में फलों के राजा आम के तगड़े उत्पादन की संभावना हैं। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि आम के शौकीनों का रेट सुनकर मुंह नहीं बनेगा बल्कि उन्हें कम दाम पर आम उपलब्ध होंगे।
जिले में सफीपुर, हसनगंज, औरास, फतेहपुर चौरासी व मियागंज क्षेत्र आम पट्टी के लिए प्रसिद्ध हैं। लगभग 37 हजार हेक्टेअर के क्षेत्रफल में आम के बाग फैले हुए हैं। उद्यान विभाग के मुताबिक, आम उत्पादन में ऑन और ऑफ ईयर का क्रम चलता है। ऑन ईयर में 75 से 80 क्विंटल प्रति हेक्टेअर का उत्पादन होता है जबकि आफ ईयर होने पर उत्पादन घटकर करीब आधा ही रह जाता है। इस बार ऑन ईयर होने से लगभग 27-30 लाख क्विंटल आम का रिकार्ड उत्पादन होने की संभावना है। पिछले साल ऑफ ईयर होने से आम महंगा बिका था। शौकीन लोग रेट सुनकर उदास हुए और आम का मजा नहीं ले पाए थे। इस बार ऐसा होने की उम्मीद नहीं है। इस वर्ष आम का तगड़ा उत्पादन होने की संभावना है।
इस व्यापार में मुनाफे की संभावना को देखते हुए काफी व्यापारियों ने पहले ही आम के बाग खरीद लिए हैं। बाग खरीदने वाले व्यापारियोें में जिले के ही नहीं बल्कि दूसरे जनपदों के भी शामिल हैं। हसनगंज क्षेत्र मैंगो बेल्ट के नाम से जाना जाता है। यहां के अधिकांश किसान आम के बाग के भरोसे ही रहकर साल भर अपना परिवार चलाते हैं। दूसरे नंबर पर सफीपुर क्षेत्र है। आम के उत्पादन पर मियागंज क्षेत्र तीसरे नंबर पर है।
जिले में दशहरी, लगड़ा, चौसा, लखनऊवा व बजरी आम की वैराइटी का उत्पादन होता है। इसके अलावा रामकेला आम भी काफी मात्रा में होता है लेकिन यह केवल अचार के लिए प्रयोग किया जाता है। दशहरी आम खाड़ी देशों में निर्यात भी होता है। इसके अलावा दशहरी देश के अन्य राज्यों कोलकाता, पूर्वांचल, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि प्रदेशों में भी जाता है।
जिला उद्यान अधिकारी महेश श्रीवास्तव ने कहा कि इस बार आम का ऑन ईयर है। जिस कारण उत्पादन अच्छा होने का अनुमान है। हालांकि अभी आम के पेड़ों में बौर निकल रहा है। इस बार ठंड ज्यादा समय तक पड़ने से कुछ देर हुई है।