उन्नाव। सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान की प्रचार सामग्री खरीद में घपले के आरोप पर डीएम ने मनरेगा उपायुक्त को जांच के आदेश दिए हैं। मनरेगा उपायुक्त ने टीबी कार्यालय में जांच की। कार्यालय में उन्हें प्रचार सामग्री तो मिली लेकिन स्वास्थ्य कर्मी उन्हें खरीद से संबंधित बिल वाउचर नहीं दे सके।
टीबी के खात्मे के लिए जिले में 10 अक्तूबर से सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान शुरू हुआ है। टीबी की बीमारी से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने व सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान की जानकारी आम जन तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रचार सामग्री छपवाई थी। जिसके लिए शासन से लगभग दो लाख रुपये का बजट मिला था।
जिला क्षय रोग विभाग की ओर से प्रचार सामग्री के तहत मिले बजट में घालमेल की शिकायत डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय तक पहुंची। इस पर डीएम ने मनरेगा उपायुक्त राजेश झा को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश। बुधवार शाम मनरेगा उपायुक्त टीबी कार्यालय पहुंचे और प्रचार सामग्री का ब्योरा मांगा। कर्मियों ने उन्हें कुछ सामग्री दिखाई जबकि 50 फीसदी से अधिक सामग्री ब्लाक स्तर पर भेजने की बात कही। साथ ही प्रचार सामग्री खरीद के लिए कोई अनुमोदन भी नहीं लिया गया था। मनरेगा उपायुक्त ने बताया कि उन्हें बिल वाउचर नहीं मिले थे। प्रचार सामग्री में कितने रुपये खर्च किए गए इसकी भी जानकारी नहीं दी गई है। पूरे मामले की रिपोर्ट डीएम को दी गई है।
एसीएमओ को मिल सकता है चार्ज
जिला क्षय रोग विभाग में तत्कालीन सीएमओ डॉ. लालता प्रसाद ने लेवल टू आफीसर डॉ. ज्ञान प्रकाश को विभाग की जिम्मेदारी सौंपी थी। जबकि इस पद के लिए शासन ने लेवल फोर के आफीसर को ही जिम्मेदारी देने के निर्देश दे रखे हैं। नियुक्ति में नियमों की अनदेखी की गई थी। यह मामला भी डीएम के संज्ञान में है। ऐसे में जल्द ही एसीएमओ को जिला क्षय रोग विभाग की जिम्मेदारी दी जा सकती है।